Ads 468x60px

Jul 6, 2013

वाणी ही सनातन आभूषण है॥ अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 16



केयूरा न विभूषयन्ति पुरुषं हारा न चन्द्रोज्ज्वलाः
न स्नानं न विलोपनं न कुसुमं नालङ्कृता मूर्धजाः।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषं या संस्कृता र्धायते
क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्॥

Hindi Translation


बाजुबंद पुरुष को शोभित नहीं करते और न ही चन्द्रमा के समान उज्ज्वल हार, न स्नान, न चन्दन, न फूल और न सजे हुए केश ही शोभा बढ़ाते हैं। केवल सुसंस्कृत प्रकार से धारण की हुई एक वाणी ही उसकी सुन्दर प्रकार से शोभा बढ़ाती है। साधारण आभूषण नष्ट हो जाते हैं, वाणी ही सनातन आभूषण है॥

English Translation

Bracelets do not adorn a man, nor do necklaces which shine like the moon. Neither a bath, nor an ointment, nor flowers and nor decorated hair adorn him. It is cultured speech alone which properly embellishes a man. All other ornaments lose their glitter, only the jewel of speech ever remains.

पहले प्रकाशित किये गए 5 अदभुत संस्कृत श्लोक: 
  1. अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 15
  2. अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 14
  3. अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 13
  4. अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 12
  5. अदभुत संस्कृत श्लोक - भाग 11

3 comments :

  1. Sant kabeen ne bhi kaha hai ki....
    Aisi vani boliye, man ka aapa khoy,
    auran ki sheetal kare aaphu sheetal hoy..
    Dhanyawad..

    ReplyDelete
  2. वाणी के ही कारण 'महाभारत' का युद्ध हुआ। यह वाणी ही थी जिसकी वजह से एक ओर महर्षि परशुराम क्रोधावेश में आ गये लेकिन दूसरी तरफ मोम की तरह पिघले भी वाणी के कारण। इसी वाणी ने महाराजा दशरथ को अकाल मृत्य के मार्ग पर डाल दिया और इसने ही राक्षस कुल में पैदा हुए विभीषण को प्रभु राम का प्रिय बनाया।
    गीता का ज्ञान भी योगेश्वर श्री कृष्ण जी की वाणी ही था।

    सच्चा जादूगर, प्रबंधक, चतुर वही है जो वाणी पर नियंत्रण करना सीख गया हो।

    ReplyDelete
    Replies
    1. Kuch behtarin udaharano se aapne vani ki mahatta par prakash dala.Thank you Jaiprakash..सच्चा जादूगर, प्रबंधक, चतुर वही है जो वाणी पर नियंत्रण करना सीख गया हो।--shat pratishat sahi kaha..

      Delete