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Aug 21, 2014

बोध कथा - ईर्ष्या-द्वेष आपके मन पर बोझ है इन्हें निकाल फेंकें| [Moral Hindi Story]

Moral Hindi Story About Getting Free From Envy And Jealousy

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एक बार एक महात्मा ने अपने शिष्यों से अनुरोध किया कि वे कल से प्रवचन में आते समय अपने साथ एक थैली में बडे़ आलू साथ लेकर आयें, उन आलुओं पर उस व्यक्ति का नाम लिखा होना चाहिये जिनसे वे ईर्ष्या करते हैं । जो व्यक्ति जितने व्यक्तियों से घृणा करता हो, वह उतने आलू लेकर आये ।

अगले दिन सभी लोग आलू लेकर आये, किसी पास चार आलू थे, किसी के पास छः या आठ और प्रत्येक आलू पर उस व्यक्ति का नाम लिखा था जिससे वे नफ़रत करते थे ।


अब महात्मा जी ने कहा कि, अगले सात दिनों तक ये आलू आप सदैव अपने साथ रखें, जहाँ भी जायें, खाते-पीते, सोते-जागते, ये आलू आप सदैव अपने साथ रखें । शिष्यों को कुछ समझ में नहीं आया कि महात्मा जी क्या चाहते हैं, लेकिन महात्मा के आदेश का पालन उन्होंने अक्षरशः किया । दो-तीन दिनों के बाद ही शिष्यों ने आपस में एक दूसरे से शिकायत करना शुरू किया, जिनके आलू ज्यादा थे, वे बडे कष्ट में थे । जैसे-तैसे उन्होंने सात दिन बिताये, और शिष्यों ने महात्मा की शरण ली । महात्मा ने कहा, अब अपने-अपने आलू की थैलियाँ निकालकर रख दें, शिष्यों ने चैन की साँस ली ।

महात्माजी ने पूछा – विगत सात दिनों का अनुभव कैसा रहा ? शिष्यों ने महात्मा से अपनी आपबीती सुनाई, अपने कष्टों का विवरण दिया, आलुओं की बदबू से होने वाली परेशानी के बारे में बताया, सभी ने कहा कि बडा हल्का महसूस हो रहा है… महात्मा ने कहा – यह अनुभव मैने आपको एक शिक्षा देने के लिये किया था…

जब मात्र सात दिनों में ही आपको ये आलू बोझ लगने लगे, तब सोचिये कि आप जिन व्यक्तियों से ईर्ष्या या नफ़रत करते हैं, उनका कितना बोझ आपके मन पर होता होगा, और वह बोझ आप लोग तमाम जिन्दगी ढोते रहते हैं, सोचिये कि आपके मन और दिमाग की इस ईर्ष्या के बोझ से क्या हालत होती होगी ? यह ईर्ष्या तुम्हारे मन पर अनावश्यक बोझ डालती है, उनके कारण तुम्हारे मन में भी बदबू भर जाती है, ठीक उन आलुओं की तरह…. इसलिये अपने मन से इन भावनाओं को निकाल दो,

Moral Of This Hindi Story:

यदि आप किसी से प्यार नहीं कर सकते तो कम से कम नफ़रत और ईर्ष्या मत कीजिये, तभी आपका मन स्वच्छ, निर्मल और हल्का बना रहेगा, वरना जीवन भर इनको ढोते-ढोते आपका मन और आपकी मानसिकता दोनों बीमार हो जाएँगी। 

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P.S. Thank you for reading the incredible hindi story about getting freedom from envy and jealousy. This story has been taken from Akhand Jyoti Magzine. If you loved this story consider sharing it with your friends and family using the social sharing icons below.

Aug 18, 2014

विद्वानों की विशेषताएँ - ज्ञानी पुरुष आर्थिक संपत्ति के बगैर भी अत्यंत धनी होते हैं - भर्तृहरि!

विद्वतपद्धति ( WAYS OF THE LEARNED )



शास्त्रोपस्कृतशब्दसुन्दरगिरिः शिष्यप्रदेयागमा
    विख्याताः कवयो वसन्ति विषये यस्य प्रभोर्निधनः ।
तज्जाड्यं वसुधाधिपस्य कवयो ह्यर्थं विनापीश्वराः
    कुत्स्याः स्युः कुपरीक्षका न मणयो यैरर्घतः पातितः ॥[15]

Hindi Translation of Neeti Shataka Shlok About Ways Of Scholars 


अगर कोई प्रसिद्ध कवि जो अपने शब्दों का सुन्दर इस्तेमाल करने में माहिर है, और शास्त्रों के ज्ञान में पारंगत है तथा अपने शिष्यों को भी पारंगत करने योग्य है; आपके राज्य में निर्धन है तो हे राजन यह आपका दुर्भाग्य है न की उस विद्वान कवि का!

ज्ञानी पुरुष आर्थिक संपत्ति के बगैर भी अत्यंत धनी होते हैं। बेशकीमती रत्नों को अगर कोई जौहरी
 ठीक से परख नहीं पाता तो ये परखने वाले जौहरी की कमी है क्यूंकि इन रत्नो की कीमत कभी कम नहीं होती।  


English Translation of Neeti Shatak Shlok About Attributes Of The Learned


If the celebrated poets who are eloquent with the usage of beautiful words refined by the knowledge of the scriptures; who have gathered and mastered enough knowledge to be imparted through disciples efficiently; are in your state without any wealth then it is the apathy of the ruler! The men of wisdom are rich even without the material wealth! Precious gems get despised by those who do not have the expertise to appraise them, and appear less in value; but gems never ever lose their real worth!

इस श्लोक से क्या सीखें ?

यह श्लोक हमें सिखाती है कि हमें व्यक्तियों की पहचान और उनका सम्मान उनके ज्ञान के आधार पर करनी चाहिए हमें उनका आंकलन उनके भौतिक संपत्ति और धन से नहीं करना चाहिए तथा हमारा लक्ष्य भी ज्ञान अर्जन ही होना चाहिए!!

नीति शतक के पहले प्रकाशित किये गए श्लोक:
  1. सम्पूर्ण भर्तृहरि नीति शतक हिंदी और अंग्रेजी में | Complete Bhartrihari Neeti Shatak In Hindi & English
  2. साहित्य, संगीत और कला से विहीन मनुष्य साक्षात पशु के समान है| Bhartrihari Neeti Shatakam-Shlok-12
  3. किसी भी शाश्त्र में मूर्खता का कोई इलाज नहीं है। Bhartrihari Neeti Shatakam-Shlok-11
  4. जानिए कैसे लोग इस धरती पर बोझ हैं - Bhartrihari Neeti Shatakam-Shlok-13
  5. जानिए किनके साथ स्वर्ग में रहना भी हितकर नहीं है - Bhartrihari Neeti Shatak-Shlok-14

Aug 16, 2014

न चाहूं मान - राम प्रसाद बिस्मिल

Patriotic Hindi Poem By Ram Prasad Bismil

न चाहूँ मान दुनिया में, न चाहूँ स्वर्ग को जाना
मुझे वर दे यही माता रहूँ भारत पे दीवाना


करुँ मैं कौम की सेवा पडे़ चाहे करोड़ों दुख

अगर फ़िर जन्म लूँ आकर तो भारत में ही हो आना 


लगा रहे प्रेम हिन्दी में, पढूँ हिन्दी लिखुँ हिन्दी

चलन हिन्दी चलूँ, हिन्दी पहरना, ओढना खाना


भवन में रोशनी मेरे रहे हिन्दी चिरागों की

स्वदेशी ही रहे बाजा, बजाना, राग का गाना


लगें इस देश के ही अर्थ मेरे धर्म, विद्या, धन

करुँ मैं प्राण तक अर्पण यही प्रण सत्य है ठाना


नहीं कुछ गैर-मुमकिन है जो चाहो दिल से “बिस्मिल” तुम

उठा लो देश हाथों पर न समझो अपना बेगाना|

-राम प्रसाद बिस्मिल

Aug 15, 2014

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ - Happy Independence Day To All

सभी देश-वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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हे मातृभूमि - राम प्रसाद बिस्मिल


हे मातृभूमि ! तेरे चरणों में शिर नवाऊँ ।
मैं भक्ति भेंट अपनी, तेरी शरण में लाऊँ ।।

माथे पे तू हो चंदन, छाती पे तू हो माला ;
जिह्वा पे गीत तू हो मेरा, तेरा ही नाम गाऊँ ।।

जिससे सपूत उपजें, श्री राम-कृष्ण जैसे;
उस धूल को मैं तेरी निज शीश पे चढ़ाऊँ ।।

माई समुद्र जिसकी पद रज को नित्य धोकर;
करता प्रणाम तुझको, मैं वे चरण दबाऊँ ।।

सेवा में तेरी माता ! मैं भेदभाव तजकर;
वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनूँ सुनाऊँ ।।

तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मंत्र गाऊँ।
मन और देह तुझ पर बलिदान मैं जाऊँ ।।
-राम प्रसाद बिस्मिल

Aug 12, 2014

वृद्धाश्रम - रवि जैन - Hindi Poem About Vriddhasharam(Old Folk's Home)

हिंदी साहित्य मार्गदर्शन के माध्यम से हमने हमेशा से प्रतिभाशाली कवियों की कविताओं को आप तक पहुँचाने का प्रयास  किया है।  इसी प्रयास के तहत आज हम एक बेहतरीन कविता को प्रकाशित कर रहे हैं।   आशा है कि आज के आधुनिक समाज पर कटाक्ष करती ये कविता आपको झकझोर जाएगी।  


वृद्धाश्रम 

 जिनके आँचल मे रहकर पलना था सिखा,
 जिनकी उंगली पड़कर चलना था सिखा,
 आज वही बच्चे माँ के दूध का ऐसा कर्ज़ चुकाते है
 अपने माँ-बाप को वो वृद्धाश्रम छोड़ आते है॥ 


 जिनके कंधे पर बेठकर देखा था मेला,
 जिसने तुम्हारी खातिर सारा दुख था झेला,
 ऐसे माँ-बाप को वो खुशिया नहीं दे पाते है,
 अपने माँ-बाप को वो वृद्धाश्रम छोड़ आते है॥ 


 जिसने हर दुख-सुख मे तुम्हारा साथ नहीं छोड़ा,
 जिसने कभी अपने कर्तव्यो से मुँह नहीं मोड़ा,
 आज अपने माँ-बाप का वो हाथ ऐसे ही छोड़ चले जाते है,
 अपने माँ-बाप को वो वृद्धाश्रम छोड़ आते है॥ 


 याद रखना बात इस रवि की एक पल ऐसा भी आयेगा,
 जब समय का चक्र फिर वही घूम जाएगा,
 जहाँ पहुँचाया है आज तूने अपने माँ-बाप को,
 कल तेरा बेटा भी तुझे वही पहुँचायेगा,
 और वहां जब तेरे कोई काम नहीं आयेगा,
 तब वहां तेरे माँ-बाप का सहारा ही तुझे अपनायेगा.॥ 


 -रवि जैन 

Author Bio



Name :- Ravi Jain

Profession :- IT Straggler engineer and most important thing an Indian.

Aim :- Trying to encourage people for growth of India.

city : Mandsaur (M.P.)





P.S: We hope that this incredible poem about Vriddhashrama(Old Folk's Home) has touched your heart. If you liked this hindi poem do share it with your friends and family. If You are also a writer or a poet and would like to share your article or poem with thousands of hindi lovers then do send it to nisheeth.exe@gmail.com, and we would publish it with due credit.

Aug 7, 2014

प्रेरक प्रसंग - क्रोध हमारी सही गलत पहचानने की शक्ति को क्षीण कर देता है! [ Moral Hindi Story ]

Moral Hindi Story About Anger Management



खलीफा उमर का सारा जीवन धार्मिक सेवा में बीता था। अन्त में तो उन्हें धर्म के लिए तलवार भी उठानी पड़ी। एक दिन उनका अपने प्रतिद्वंद्वी से सामना हो गया। दोनों में गुत्थमगुत्था हो गई। उमर ने उसे पछाड़ दिया और छाती पर चढ़ बैठे। जैसे ही उसका सिर काट डालने के लिए उन्होंने अपनी तलवार निकाली कि प्रतिद्वंद्वी ने उन्हें गाली देदी। गाली सुनते ही खलीफा उमर उठकर खड़े हो गये और अपनी तलवार म्यान में बन्द कर ली।
जो सैनिक उनके साथ थे उन्हें इस पर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने कुछ रुष्ट स्वर में कहा- श्रीमान् जी आपने यह क्या किया आपको तो इसे मार ही देना चाहिए था। खलीफा उमर गम्भीर हो गये और बोले भाई मैंने युद्ध न्याय के लिए बिना क्रोध के किया था, किन्तु जब इसने मुझे गाली दी तो मुझे क्रोध आ गया। इस स्थिति में इसे मारने से पहले अपने क्रोध को मारना आवश्यक हो गया। अब मेरा क्रोध शान्त हो गया हैं इसलिए दुबारा युद्ध करूंगा।

खलीफा उमर का यह निष्काम शब्द सुनकर प्रतिद्वंद्वी अपने आप प्रादुर्भूत होकर उनके पैरों पर गिर गया और सदैव के लिए उनका भक्त बन गया।

Moral Of The Story: दोस्तों ये कहानी हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है, ये हमें सिखाती है की जीवन में परिस्थितियां कितनी ही अनुकूल या प्रतिकूल क्यों न हो हमें क्रोध नहीं करना चाहिए, क्रोध ही हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, क्रोध हमारी सही गलत पहचानने की शक्ति को क्षीण कर देता है और हमें सच्चाई के प्रति अँधा बना देता है। क्रोध पर नियंत्रण अथवा विजय प्राप्त करके हम अपने आप को और अपने  आस - पास के परिवेश को बेहतर बना सकते हैं।

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