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Apr 16, 2014

कमी निकालना और बुराई करना बेहद आसान होता है, और उन कमियों को सुधारना उतना ही कठिन |

एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था । चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनाई और उसे नगर के चौराहे मे लगा दिया और...  नीचे लिख दिया कि जिस किसी को , जहाँ भी इस जब उसने शाम को तस्वीर देखी उसकी पूरी तस्वीर पर निशानों से ख़राब हो चुकी थी ।

यह देख वह बहुत दुखी हुआ । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे वह दुःखी बैठा हुआ था । तभी उसका एक मित्र वहाँ से गुजरा उसने उस के दुःखी होने का कारण पूछा तो उसने उसे पूरी घटना बताई । उसने कहा एक काम करो कल दूसरी तस्वीर बनाना और उस मे लिखना कि जिस किसी को इस तस्वीर मे जहाँ कहीं भी कोई कमी नजर आये उसे सही कर दे ।

उसने अगले दिन यही किया । शाम को जब उसने अपनी तस्वीर देखी तो उसने देखा की तस्वीर पर किसी ने कुछ नहीं किया ।

वह संसार की रीति समझ गया । "कमी निकालना , निंदा करना , बुराई करना बेहद आसान होता है , लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है "।

पहले प्रकाशित किये गए अद्भुत प्रेरक प्रसंग:
  1. स्वयं आपत्ति और दुःख का स्वाद चखे बिना पराये दुःख और विपत्ति का एहसास नहीं होता है !
  2. सरदार वल्लभ भाई पटेल से जुड़ा प्रेरक प्रसंग | Incredible Stories From Great Lives
  3. बुद्ध संघ की अर्थनीति - अद्भुत प्रेरक प्रसंग
  4. पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन से जुड़ा प्रेरक प्रसंग !
  5. बचपन में मिले संस्कार ही व्यक्ति को आगे चलकर महामानव बनाते हैं।

Apr 9, 2014

सरदार वल्लभ भाई पटेल से जुड़ा प्रेरक प्रसंग | Incredible Stories From Great Lives

Apr 7, 2014

मुर्ख को सही बात समझाना असम्भव है-भर्तृहरि नीति शतक-श्लोक ४ | Bhartrihari Neeti Shatak - shlok-4

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प्रहस्य मणिमुद्धरेन्मकरवक्रदंष्ट्रान्तरात्
    समुद्रमपि सन्तरेत्प्रचलदूर्मिमालाकुलम् ।
भुजङ्गमपि कोपितं शिरसि पुष्पवद्धारये
    न्न तु प्रतिनिविष्टमूर्खजनचित्तमाराधयेत् ॥ 

Hindi Translation Of Bhartrihari Neeti Shatak 4th Shloka


अगर हम चाहें तो मगरमच्छ के दांतों में फसे मोती को भी निकाल सकते हैं, साहस के बल पर हम बड़ी-बड़ी लहरों वाले समुद्र को भी पार कर सकते हैं, यहाँ तक कि हम  गुस्सैल सर्प को भी फूलों की माला तरह अपने गले में पहन सकते हैं; लेकिन एक मुर्ख को सही बात समझाना असम्भव है।  


English Translation Of Bhartrihari Neeti Shatak 4th Shloka



With courage, we could extract the pearl stuck in between crooked teeth of a crocodile. We could sail across an ocean that is tormented by huge waves. We may even be able to wear an angry snake on our head as if it were a flower. However it is impossible to satisfy an obstinate fool.


नीति शतक के पहले प्रकाशित किये गए श्लोक:
  1. भर्तृहरि नीतिशतकम् - मूर्खपद्धति | Bhartrihari Neeti Shatakam - Murkhpaddhati-Shlok 1,2,3  

Apr 2, 2014

बुद्ध संघ की अर्थनीति - अद्भुत प्रेरक प्रसंग

Mar 27, 2014

ज़र्रों में क्यूँ खोज रहा है काफ़िर शुकून के पल यहाँ - केशव किशोर जैन

ज़र्रों में क्यूँ खोज रहा है काफ़िर शुकून के पल यहाँ,  
ज़िन्दगी की रेत पर टिकते हैं वक़्त के निशान कहाँ |      

कहीं धुप खिली है आज जहाँ, कल शायद छायाँ हो जाए. 
कोई शोला है जो आज यहाँ कल शायद शबनम बन जाए |

तू पथिक नहीं अकेला है दरिया की तालाश में.
बहुतेरे हैं हमराही तेरे, जो झुझ रहे अंगारों से|  

लौह है तेरी भुजाओं में, है तेज तुझमे सूर्य का
तेरी रगों में जो खून बह रहा, वो है आर्य पूत का |

निश्चय हो तेरा अटल अभी, तपस्या हो अविरल तेरी.
आगे है दुर्गम राहें तेरी, भूल न जाना मंजिल अपनी |

जजबातों की मजधार में तू मत फंसना,
घनघोर घनेरे जंगले में तू नही बहकना,
रम्भा के हुस्न पर भी पर तू नहीं फिसलना,
तूफ़ान भी आए तो इक पग भी नही हिलना |    

जो तुझे न कोई फ़िक्र हो, ना दूजी कोई चाह हो
तू सिर्फ एक लक्ष्य को पाने को बेताब हो
तुझे न कुझ भी कर गुजरने से इनकार हो
तो होगी फिर जीत तेरी जो वक़्त को स्वीकार हो!
- केशव किशोर जैन 

Author Bio


Name: Keshav Kishor Jain
Date of Birth: 08/08/1991
Place: Bhagalpur, Bihar
Profession: IT Professional
Qualification: B.Tech (Hons.) IIT Kharagpur
About Me: I started writing poems when I was in my college. I read a lot of poems by Harivansh Rai Bachchan and Jaishankar Prasad which helped me shape my love towards poetry. I passed out of IIT in 2013. But my love towards poetry continues. I write poems of various genres like inspirational, romantic and philosophical poems.   
Hobbies: I love blogging and web designing while at the same time I am addicted to reading novels and watching movies. 



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