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रूडयार्ड किपलिंग ने सच ही कहा था भगवान हर जगह नहीं हो सकते हैं, इसलिए उन्होंने मां की रचना की।

आने वाले ८ मई को विश्व में कई जगह माताओं का सम्मान करने के लिए मातृ दिवस (Mothers Day) मनाया जा रहा है, इसी उपलक्ष्य में हम एक अद्भुत कविता प्रकाशित कर रहे हैं जिसे दिनेश करमचंदानी ने लिखा है, दिनेश पेशे से एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हैं लेकिन साहित्य और कविताओं में विशेष रूचि रखते हैं!!

Hindi essay on social issues in India;social problems essay in India

आज हमारे देश को स्वत्रंता प्राप्त किये लगभग 68 वर्ष पूर्ण हो चुके है जब कभी भी मुझे एकांत में अपने समाज के प्रति सहानुभूति उत्पन्न होती है तो मैं गहन चिंतन के गहन सागर में डूब जाता हूँ जिसके साथ मेरे हृदय में वर्तमान समाज कि स्थिति को लेकर काफी पीड़ा होने का साथ-साथ कुछ लोगों की दिनचर्या पर हंसी आनी भी स्वाभिक है। आज का मानव इतना स्वार्थी व खुदगर्ज होता जा रहा है कि उसका बुद्धि विवेक मानो कहीं जंगल में घास चरने गया हो। उसको नीति या अनीति पूर्ण कार्य, जिनकों हमारा समाज या हमारी र्अन्तआत्मा अस्वीकार कर देती है मात्र क्षणिक लालच के लिए कोई भी अकृत्य करने के लिए उतारू हो जाता है।  मानव आपनी सभ्यता संस्कृति को भूल कर पाश्चात्य सभ्यता को अधिक महत्व देना उचित समझता है मानो यह सभ्यता उनके बाप-दादा ने उन्हें विरासत में दी हो। भले ही हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र है पंरतु ऐसा नहीं है कहीं ना कहीं आज भी वैचारिक रूप से ब्रिटीस सरकार के गुलाम है और यह तब तक संभव नहीं है जब तक हम अपने जीवन में  राष्ट्र के प्रति पूर्ण भक्ति व समपर्ण की भावना को उद्भव नहीं कर लेते। यदि हमें अपने समाज की निर्मल व सरल बनाना है तो हमें पाश्चात्य सभ्यता का पूर्ण रूप से किसी गंगा जी के तट पर तृपण करना होगा। कभी-कभी तो मेरे अन्त: हृदय में इतनी आत्मगिलानी सी महसूस होती है कि मैं अपने आप को धिक्कारने से इंकार नहीं कर पाता और गहन चिंतन में समा जाता हूँ कि हमारे देश में युगों-युगों से ऐसा तो नहीं था वर्तमान में तो आये दिन हालात बद से बद्दतर होते जा रहे है। स्त्री और पुरूष समाज रूपी सिक्के के दो पहेलू समझे तो गलत नहीं होगा यदि हम अपने गत वर्षों के 60 के दशक पर अपनी दूर दृष्टि डाले तो मेरे अनुमान से बहु बेटियां, माताएं जो 56 गज के परिधान को धारण करना पंसद करती थी किंतु अब तो स्थिति विपरित दिशा में प्रवाहित होती नजर आती है। आधुनिक स्त्री तो परिधान को सीमित सीमा से भी निम्र धारण करना पंसद करती है। मुख्य कारण यहीं तो है जिसकी वजह से आये दिन आधुनिक स्त्रीयों से दुरव्वहार की घटनाएं होती रहती है।

        सिक्के के दूसरे पहलू पुरूष वर्ग की बात करें तो वह भी पाश्चात्य सभ्यता की मैराथन दौड़ में अपने आप को वरिष्ठ पूंजीपति घोषित करने में पीछे नहीं है। उसे चाहे इस कार्य के लिए कोई भी अनीति पूर्ण कर्म करना पड़े। वह किसी भी हद से गुजरने को सदैव तत्पर रहते हंै। अमुख व्यक्ति के हृदय में भले विचार भी क्यों न उठते हो?, पर पूंजीपति की दौड़ में खुद की इस लालसा को प्रबल रखना चाहता है। मध्यम व दरिद्र व्यक्ति का आज के समय में जीवन यापन करना बढ़ा टेड़ी खीर साबित हो रहा है। सरकारी कार्य कराने के लिए दिन-प्रतिदिन कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हंै या फिर घूस के लेन-देन का सहारा लेना पड़ता है।

        घूस का नजारा तो आप को आस पास के वातावरण में कहीं न कहीं आम चौराहों पर देखने को आये दिन मिल ही जायेगा, घूस की वजह से जो काबिल व्यक्ति है वो अच्छे अंको से प्रतियोगिता परिक्षाओं में पास होने के बावजूद भी बेरोजगारी का  शिकार होने के कारण किसी ढ़ाबे या रेस्त्रा, अन्य जगहों पर रिक्शा चलाते देखे जा सकते है। जो पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार के दंश को झेल रहे हंै। उपर्युक्त व्यक्ति आप को आपके आस-पास क्षेत्र में असंख्य मिल जायेंगे। हमारे समाज में जो  लूट या राहजनी की घटनाएं सामान्य: बेरोजगारी के सताये लोग ही उसे अंजाम तक पहुंचते है। क्योंकि वर्तमान समय में मंहगाई इतनी है कि अमुख कार्य से पर्याप्त धन अर्जित नहीं किया जा सकता जिससे उनके बच्चों का भरण-पोषण अच्छे तरह से संचालित हो सकें।

        हम यदि दूसरी तरफ समाज में कर्म के भ्रष्टाचार पर चर्चा करें तो उसकी स्थिति भी राष्ट्र पटल पर बड़ी ही सोचनीय है। देश में काफी असंख्य विभाग है व असंख्य कर्मचारी गण है। कुछ सरकारी मुलाजि़म इतने ढीठ व निर्लज्ज, चिकने घड़े के मानिंद हंै, उनकी स्थिति ऐसी है जैसे किसी स्वान की पूंछ को एक बेलन नल्लिका में 12 वर्ष तक सीधी स्थिति में लाने के लिए स्थापित किया गया पर पूर्ण समय होने पर जब बड़ी उत्सुकता के साथ निकाला गया तो परिणाम जीरो मिलता है। जो कार्यालय का निर्धारित समय है, उनका सदैव विलम्ब से पहुंचना व शीघ्रता से अपने घर की ओर वापस प्रस्थान करना मानो उनकी एक आदत सी बन जाती है। वो वास्तव में अपने आप को इस सदी का शेक चिल्ली समझ बैठते है और व्यवहार का तो पूछो ही मत। जनता से पेश आना तो मानो जानते ही नहीं। वो भूल जाते है कि जिसके साथ शिष्टाचार से पेश आना चाहिये उन्हीं की सेवा के लिए सरकारी पद पर तैनात है और जनता के मुलाजि़म हैं, उनकी संकीर्ण बुद्धि में यह बात नहीं आती की यदि कबूतर समझे कि मैं अपनी आंखे बंद कर लेता हूँ और बिल्ली मुझे कुछ नहीं करेगी ऐसा उनका सोचना उनकी बुद्धि लब्धि जीरो होने का संकेत देता है। वो कहीं ना कहीं अपने आप को व अपनी आने वाली पीढिय़ों को धोखा दे रहे हैं। जिसमें वे अपना ही अहित कर बैठते है।

        यदि हम बात करें उपचारक या चिकित्सक की तो हमारे देश में चिकित्सक को भगवान की संज्ञा दी जाती है पर आज के समाज में कुछ स्थानों पर निजी चिकित्सालयों में चिकित्सक की स्थिति बड़ी भद्दी, जल्लाद पूर्ण हैं। वो किसी भी अमानवीय कर्म को करने के लिए किसी भी सीमा को आसानी से लांघ सकते है। उनका उद्देश्य केवल अपनी तिजोरियों में असीमित धन की बढ़़ोतरी करना है। उनके इस कुकृत्य से ऐसा महसूस होता मानों  निजी चिकित्सालयों में मानवता कहीं कोने में दुबक दीर्घ अश्रु धारा से रो रही हो। मरीज को भले ही मामूली सा ज्वर आया हो, अन्य कोई बीमारी जैसे पीलिया अथवा कोई भी मामूली श्रेणी की बीमारी हो, जिसका मोटा शुल्क वसूला जाता है। चिकित्सकों पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि मरीज़ का स्वास्थ्य ठीक हुआ या नहीं। यहीं कारण है कि सार्वजनिक चिकित्सालयों में रोगियों की भीड़ ठसा-ठस होती है और वहां की स्थिति भी शौचनीय ही होती है  इस प्रकार की व्यवस्था आप को दिल्ली या आस पास के क्षेत्रों में प्राय: देखने का मिल सकती है।


        यदि वर्तमान समाज में राजनीति का विश्लेषण करें तो इस विषय पर चर्चा करना स्वाभिक सा हो जाता है।

        महात्मा गांधी जी जिन्होंने राजनीति भी की तो एक महात्मा की तरह उनके अनुसार राजनीति ऐसी होनी चाहिये जो धर्म पर आधारित हो जिसमें नि:स्वार्थ भावना व धर्म नीति व सर्व हितैषी नीति की महक आये। तब ही हमारा राष्ट्र उन्नति की ओर अग्रसर होगा।

        परंतु यहां तो समाज में कुछ ओर ही हो रहा है।  आज का लोगों की बुद्धि इतनी मलीन हो गई है कि वो जनता को इस कदर से बेवकूफ बनाते है और हमारे देश की जनता भोली भाली अपना बुद्धि विवेक खत्म कर भेड़ा चाल की मानिंद पीछ़े पीछ़े आंखे बंद कर चल देते है। अपने ही किसी राजनीतिक स्वार्थ के कारण समाज में दंगे फसाद शुरू करा दिये जाते है जो बाद में सांप्रदायिकता का रूप ले लेते है जिसमें भोली भाली जनता का काफी बड़ा अहित  होता है, और देश की आर्थिक स्थिति भी इसकी लपेट में आ जाती है।

शिक्षा के क्षेत्र में अनेक शिक्षा शास्त्रियों ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक उत्साह पूर्वक भरसक प्रयास किये। अनेक शिक्षा शास्त्रियों के मतानुसार बालक को विद्यालय का देवता व शिक्षक खुद का पुजारी समझे तभी देश में अच्छी शिक्षा का संचार होगा जिससे हमारा देश सुदृढ़़ व शिक्षित बनेगा।

        अरे जनाब हमारे समाज में तो वर्तमान विद्यालयों में कुछ और ही हो रहा है कुछ निम्र बुद्धि के छात्र व शिक्षक जो राजनीति को अपना भविष्य बनाना चाहते है खुद ही भस्मासुर बन रहे हैं। भारत के टुकड़ो की बात कर रहे है हमारे शूर वीर योद्धा जो हमारे देश की अंतिम रेखा पर भूधर मानिंद पराक्रमी योद्धा देश सेवा के लिए अपने प्राणों की आहुति देश की अंखड़ता व एकता रूपी यज्ञ में देने से भी तनिक भी विचलित नहीं होते।

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        अरे मूर्ख प्राणियों , छोटी सोच रखने वाले भारती के कपूतो तुम उन्हीं उज्ज्वल व साफ छवि रखने वाले शूरों वीरों पर लाच्छण लगाते हो जिनकी वजह से आज तुम खुली हवा में सांस ले रहे हो। तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आती, पहले अपने गिरावान में झाकों।

                अन्तत: लेखक के अन्र्तहृदय में तो समाजिक बुराइयों के दमन के प्रति जो आग है वह अभी बुझी नहीं, मैं अपने विचारों को विराम देना चाहूंगा क्योंकि इस विषय पर दीर्घ चर्चा संभव नहीं है अंत में अपने देश के उच्च सिंहासन पर आसीन माननीय मंत्रीयों से गुजारिश करना चाहूंगा भ्रष्टाचार हमारें देश में एक ऐसा रोग है जो हमारे समाज को दीमक की तरह खा रहा है और वर्तमान के समाज के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। यदि अत्यंत गंभीर सामजिक समस्या पर दीर्घ वेग से जड़ से नहीं उखाड़ा गया तो कुछ आगामी वर्षों में जो परिणाम हमारे समक्ष होंगे वो बड़े ही भयावह व अकल्पनीय होंगे।

        यदि अति शीघ्र उपर्युक्त समस्याओं के निदान के लिए कोई पहल की जाती है तो हमारे विश्व गुरू कहे जाने वाले राष्ट्र को सोने की चिडिय़ां बनने से दोबारा कोई नहीं रोक सकता।

        लेखक की रचना की कुछ पंक्तियों जो इस लेख पर सटिक साबित होती है।

पथिक के पद चले, पथ बड़े कठिन है
भ्रष्ट है गण यहां ईमानदारी निम्र है।
धनाढ्य को माफ सभी दरिद्र को दंड है। 
समाज ही क्या सांस लेना भी कठिन है।
                       
                लेखक                               
अंकेश धीमान पुत्र श्री जयभगवान
 बुढ़ाना, मुजफ्फरगनर उत्तर प्रदेश
संपर्क सूत्र9411621807,9711197620
Email Id-licankdhiman@yahoo.com
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Quotes & Slogans By Martin Luther King Jr In Hindi



एक सच्चा लीडर लोगो के विचारों के पीछे नहीं चलता बल्कि वो लोगो के विचारो को बदल देता है।” ~ मार्टिन लूथर किंग जूनियर

 “किसी भी जगह हो रहा अन्याय हर स्थान पर न्याय के लिए खतरा है।” ~ मार्टिन लूथर किंग जूनियर

हमारे जीवन का उस दिन अंत होना शुरू हो जाता है, जिस दिन हम उन मुद्दो के बारे में चुप हो जाते है जो आम समाज के लिए मायने रखते है।” ~ मार्टिन लूथर किंग जूनियर

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एक दिन बीरबल दरबार में देर से पहुंचे 

जब बादशाह ने देरी का कारण पूछा तो उन्होंने बताया, 'मैं क्या करता हुजूर! मेरे बच्चे आज जोर-जोर से रोकर कहने लगे कि दरबार में न जाऊं। 

किसी तरह उन्हें बहुत मुश्किल से समझा पाया कि मेरा दरबार में हाजिर होना कितना जरूरी है। इसी में मुझे काफी समय लग गया और इसलिए मुझे आने में देर हो गई।’


बादशाह को लगा कि बीरबल बहानेबाजी कर रहे हैं।

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दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। 


बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी राय अलग है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि सभी एक जैसे क्यों नहीं सोचते!

Top 50+ Inspirational Quotes By Lao Tzu In Hindi
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चीजों को संभालने में अक्सर लोग सफल होते-होते असफल हो जाते हैं,  यदि कोई अंत में उतना ही सजग रहे जितना कि वो आरम्भ में  था तो कोई असफल हो सही नहीं सकता।“ ~ लाओत्से

कठिन कामों को तब करें जब वे आसान हों और महान कामों को तब करें जब वे छोटी हों, हज़ारों मीलों की यात्रा एक कदम से ही शुरू होती है।“ ~ लाओत्से

जीवन स्वाभाविक और स्वछंद बदलावों की कड़ी है। उन्हें रोकना नहीं चाहिए। सच को सच की तरह स्वीकार किया जाना चाहिए। चीजो को स्वभाविक तरीके से होने दीजिये, जैसी की वह होना चाहती है।“ ~ लाओत्से

जो अच्छे हैं उनके साथ अच्छा व्यवहार कीजिये। जो अच्छे नहीं हैं उनके साथ भी अच्छा व्यवहार कीजिये, ताकि अच्छाई हर जगह रहे। जो ईमानदार हैं उनके साथ ईमानदार रहे, और जो ईमानदार नहीं हैं उनके साथ भी ईमानदार रहे, ताकि ईमानदारी भी हर जगह रहे।“ ~ लाओत्से

jeena ho to marne se nahi daro peom by dinkar,rastrakavi dinkar poem in hindi

वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो 
चट्टानों की छाती से दूध निकालो 
है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो 
पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो 

चढ़ तुंग शैल शिखरों पर सोम पियो रे 
योगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे! 

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अमेरिका के बिल गेट्स कई साल तक दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके है | बचपन से ही कंप्यूटर और तकनीक से प्यार करने वाले गेट्स को एक काम से बेहद प्यार था वो था “उल्टे हाथ से लिखना ” | अपने प्यार को उन्होंने आदत बनाया और आगे चलकर अपने उल्टे हाथ के बलपर माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी बनाकर दुनिया को नई राह दिखाई जिसके लिए विश्व आज भी उनका आभारी है |

विलियम हेनरी गेट्स उर्फ़ बिल गेट्स का जन्म 28 अक्टूबर 1955 को सिएयत्ल वाशिंगटन में हुआ था | स्कूल में उन्होंने लगभग सभी विषयों में खासकर गणित और विज्ञानं में विशेष योग्यता प्राप्त कर ली | यही से उनका कंप्यूटर से प्रेम प्रारम्भ हुआ | पढाई के दौरान ही कंप्यूटर प्रोग्राम बनाकर उन्होंने 4200 डॉलर कमा लिए और अपने अध्यापक से कहा की मै 30 वर्ष की उम्र में करोडपति बनकर दिखाऊंगा | हार्वर्ड विश्वविद्यालय में उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की और केवल 31 वर्ष की उम्र में अरबपति बन गये |

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अपने मजबूत हौसले और बुलन्द इरादों से सब कुछ पाया जा सकता है, चाहे वो कितना भी कठिन क्यो न हो, ये बात साबित की है दीपा करमाकर ने। दीपा करमाकर का जन्म 9 अगस्त, 1993 मे अगरतला मे हुआ था। ये सुर्खियो मेँ तब आई जब इन्होनेँ पहली बार 2014 मे कॉमनवेल्थ गेम्स मे कांस्य पदक जीतकर,ऐसा करने वाली खेल के इतिहास मे प्रथम भारतीय महिला बनने का गौरव प्राप्त किया। और ये विश्व के उन पाँच चुनिँन्दा महिलाओ मे से एक है,जिन्होने सफलता पूर्वक प्रॉडुनोवा वॉल्ट को पुरा किया और साथ ही सबसे उच्चतम अंक बनाने का कीर्तिमान भी रचा।


इनके पिता एक कोच थे, तो इन्हे भी बचपन से ही खेलो से बहुत लगाव था। और इसीलिए मात्र 6 साल की उम्र से ही इन्होनेँ जिमनास्टींग की तैयारी शुरु कर दी। सन 2007 मे ये जूनियर नेशनल कम्पटीशन जलपॉइगुड़ी मे जीती जिसने इनके मनोबल को और बढ़ाया।

Nisheeth Ranjan

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