अप्रिय और कटु वचनों से दिए गए घाव कभी नहीं भरते || Incredible Sanskrit Shloka About Harsh & Inappropriate words


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संरोहति अग्निना दग्धं वनं परशुना हतं ।
वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक् क्षतम् ॥

Hindi Translation

भयानक आग से नष्ट हुए वन या फिर कुल्हाडियों से काटे गए वन में भी धीरे-धीरे पेड़-पौधे उगने लगते हैं, लेकिन अप्रिय और कटु वचनों से दिए गए घाव कभी नहीं भर पाते हैं ।  


English Translation

A forest burnt down by fire, or cut down by axe will eventually grow back. But wounds caused by harsh, inappropriate words will never heal.

 Tags: Subhashitani|Subhashit|Sanskrit Shlokas| Hindi Subhashit|

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