$type=carousel$sn=0$cols=4$va=0$count=12$show=home

शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कहानी ~ अलिफ लैला

उपर्युक्त कहानी के मध्य में एक यात्रा में जैनुस्सनम के दरियाबार देश मे जाने का भी उल्लेख है। वहाँ की एक चित्ताकर्षक कथा उस ने सुनी थी। वह कथा भी इस जगह कही जाती है। 

हैरन नगर में एक बड़ा प्रतापी बादशाह था जिसे भगवान ने सब कुछ दे रखा था। किंतु उस के कोई संतान नहीं थी। एक रात को उसे सपने में दिखाई दिया कि एक दिव्य पुरुष उस से कह रहा है, उठ, भगवान तेरी मनोकामना पूरी करेगा। सुबह माली से अपने बाग का एक अनार मँगा कर खाना।

सवेरे नमाज पढ़ने के बाद उस ने माली से अनार मँगाया और उस में से निकले पचास दाने खाए क्योंकि उस की पचास रानियाँ थीं। इस के बाद वह एक-एक कर सभी के पास गया। ईश्वर की कृपा से एक रानी पीरोज के अलावा उस की सभी रानियाँ गर्भवती हो गईं। बादशाह को इस बात से बड़ी ग्लानि हुई। उसे विश्वास हो गया कि यह रानी बाँझ है। उस ने चाहा कि पीरोज का वध करवा दे किंतु उस के मंत्री ने उसे ऐसा करने से रोका और कहा कि संभव है वह भी गर्भवती हो किंतु उस में गर्भ के लक्षण प्रकट न हुए हों। बादशाह ने कहा, अच्छी बात है। मैं इसका वध नहीं कराऊँगा किंतु इसे अपने पास नहीं रहने दूँगा। मंत्री ने कहा, ठीक है। उसे आप अपने भतीजे सुमेर के पास, जो समारिया देश का हाकिम है, भेज दीजिए।

अतएव बादशाह ने पीरोज को समरिया भेज दिया और साथ ही अपने भतीजे को पत्र लिखा कि हम अपनी रानी को तुम्हारे पास भेज रहे हैं। यदि उस के कोई पुत्र पैदा हो तो मुझे खबर देना। समरिया में दिन पूरे होने पर पीरोज ने एक पुत्र को जन्म दिया। सुमेर ने सूचना भिजवाई कि रानी के पुत्र हुआ है। बादशाह यह सुन कर खुश हुआ किंतु उस ने पीरोज को वापस नहीं बुलाया। उस ने सुमेर को लिखा कि यहाँ भी भगवान की दया से उनचास रानियों के पुत्र हुए हैं, तुम पीरोज के पुत्र का नाम खुदादाद रखो, उस की पैदायश की सारी रस्में करो और उस की अच्छी शिक्षा का प्रबंध करो, हम यहाँ से उस का सारा खर्चा भेजेंगे।

सुमेर नवजात शिशु का पितृवत पालन करने लगा। जब खुदादाद बड़ा हुआ तो उसे बाण-विद्या, घुड़सवारी और तत्कालीन सारी विद्याओं, कलाओं की शिक्षा प्रवीण शिक्षकों से दिलाई गई और वह सारी विद्याओं में पारंगत हो गया। अठारहवाँ वर्ष लगते उस का रूप और शरीर ऐसा निखरा कि वह संसार का सबसे रूपवान पुरुष लगने लगा। उस में जवानी का जोश उभरा तो उस ने अपनी माँ से कहा, अगर तुम अनुमति दो तो मैं समरिया से निकल कर अपने बल की परीक्षा लूँ। मेरे पिता हैरन नरेश के बहुत-से शत्रु हो गए हैं। चारों ओर के बादशाह भी हैरन पर आक्रमण करना चाहते हैं। आश्चर्य है कि ऐसे कठिन समय में भी मेरे पिता ने मुझे क्यों नहीं बुलाया और मेरे शौर्य का उस ने लाभ क्यों नहीं उठाया। फिर भी मेरा घर बैठना उचित नहीं है। मेरे पिता ने मुझे नहीं बुलाया तो न सही, मुझे चाहिए कि मैं स्वयं ही उस की सेवा में उपस्थित हूँ। माँ ने उस से कहा, यह तो ठीक है कि देश को शत्रुओं का भय हो तो तुम्हें घर पर नहीं बैठना चाहिए। किंतु तुम अभी प्रतीक्षा करो। शायद वह तुम्हें बुला भेजे। बगैर बुलाए तुम्हारा जाना ठीक नहीं है।

खुदादाद ने कहा, जब राज्य पर ऐसा संकट पड़ा हो तो बुलावे की प्रतीक्षा करना बेकार बात है। मुझे इस समय इतनी बेचैनी हो रही है कि यदि मैं तुरंत अपने पिता की सेवा में उपस्थित नहीं होता तो शायद जीवित ही न रह सकूँगा। मैं वहाँ अपनी वास्तविकता प्रकट ही नहीं करूँगा। मैं अपने को परेदशी बताऊँगा ओर उस की सेवा करूँगा। मैं तभी यह बात बताऊँगा कि मैं उस का पुत्र हूँ जब वह मेरे शौर्य से प्रभावित हो जाएगा। फिर तो नाराजगी की बात न रहेगी।

किंतु उस की माँ ने उसे जाने की अनुमति नहीं दी। इस पर वह कुछ दिनों बाद एक सफेद घोड़े पर सवार हो कर शिकार के बहाने निकला और अपने साथ कुछ विश्वस्त साथी भी ले लिए। कुछ ही दिनों में वे सब हैरन पहुँच गए। खुदादाद ने बादशाह के दरबार में प्रवेश पा लिया और जा कर उसे फर्शी सलाम किया। बादशाह ने उस का वैभव और व्यवहार देख कर उसे कृपापूर्वक अपने पास बुलाया और उस का परिचय पूछा। खुदादाद ने कहा, मैं काहिरा नगर का निवासी हूँ और एक अमीर का बेटा हूँ। मैं संसार भ्रमण के लिए अपने देश से निकला हूँ। मैं ने सुना है आप को शत्रुओं ने परेशान कर रखा है। अनुमति हो तो आप के लिए रणक्षेत्र में पदार्पण करूँ। बादशाह इस बात से बड़ा खुश हुआ और उसे अपनी निजी सेना का मुख्य अधिकारी बना दिया।

खुदादाद ने कुछ ही दिनों में उस सेना को सज्जित और शिक्षित कर दिया और उस के नायकों को भी पारितोषिक और सम्मान दे कर प्रसन्न कर दिया। मंत्रिगण भी उस के व्यवहार से मुग्ध हो गए। दरबार में उस का सम्मान सारे शहजादों और सरदारों से अधिक होने लगा। उस पर बादशाह की कृपा अधिकाधिक हो गई। उस ने सेना का विस्तार और सुप्रबंध किया। यह देख कर राज्य के शत्रुगण भी बगैर लड़े अपने देशों को खिसक गए। बादशाह ने अपने बेटों के प्रशिक्षण का भार भी खुदादाद पर डाल दिया। यद्यपि वह अपने भाइयों में सबसे छोटा था तथापि सब का अधिष्ठाता हो गया। इस बात से शहजादे उस से और भी जलने लगे। वे आपस में कहने लगे कि हमारे बूढ़े पिता को जाने क्या हो गया है कि इस परदेशी को इतना चाहने लगा है कि हम सब पर उस का आदेश चलवा दिया है। उन्होंने एक मत से कहा कि यह स्थिति असह्य है।
अलिफ़ लैला की अन्य कहानियाँ:
वे सलाह करने लगे कि इस परदेशी का क्या किया जाए। एक ने राय दी कि इसे अकेला पा कर मार डालेंगे। एक अन्य शहजादे ने कहा कि यह ठीक नहीं है, यह बात छुपी न रहेगी और बादशाह हमें कठोरतम दंड देगा। अंत में एक शहजादे की बात सब को सबको पसंद आई। उस की राय थी कि हम लोग इस से शिकार खेलने की अनुमति लें और इस बहाने निकल कर किसी दूर देश को चले जाएँ, इस से हमारे पिता को चिंता होगी और वह खुद ही इसे मरवा डालेगा। इस उपाय पर सारे शहजादे एकमत हो गए और इस योजना को पूरा करने की तैयारी करके लगे। फिर एक दिन उन्होंने खुदादाद से कहा कि हम कल शिकार के लिए जाना चाहते हैं, शाम तक वापस आ जाएँगे। खुदादाद ने अनुमति दे दी। वे लोग तो फिर लौटे ही नहीं। तीसरे दिन बादशाह ने खुदादाद से पूछा कि शहजादे दिखाई नहीं देते, वे कहाँ चले गए।

खुदादाद ने कहा, सरकार, यह सेवक स्वयं इस चिंता में है। वे मुझ से शिकार की अनुमति ले कर गए थे। आज तीसरा दिन है उनका पता नहीं है। बादशाह को भी चिंता हुई। वह रोज खुदादाद से उनका हाल पूछता और वही उत्तर पाता। अंत में एक दिन उस ने क्रोध में आ कर खुदादाद से कहा, परदेशी, तूने इतना साहस कैसे किया कि शहजादों को शिकार पर भेज दिया और खुद उन के साथ नहीं गया। अब खैरियत इसी में है कि तू खुद उनकी खोज में जा और जहाँ भी मिलें उन्हें ले कर आ। तू उन्हें न लाया तो तेरा सिर उतरवा दूँगा।

खुदादाद बादशाह के क्रोध से डर गया और कुछ धन ले कर घोड़े पर सवार हो कर चला गया। वह नगर-नगर और गाँव-गाँव उन्हें तलाश करता रहा किंतु वे कहीं नहीं मिले। वह अक्सर विलाप किया करता और कहता, मेरे भाइयो, तुम लोग कहाँ हो? तुम किसी दुश्मन के हाथ में तो नहीं पड़ गए? जब तक तुम नहीं मिलते मैं हैरन वापस नहीं जा सकता और तुम्हारा कहीं पता नहीं है। अब उस ने बस्तियों को छोड़ कर जंगलों में उन्हें ढूँढ़ना शुरू किया। इसी खोज में वह एक गहन वन में जा पहुँचा। उस में काले पत्थर का एक विशाल भवन बना हुआ था। वह जा कर उस महल के नीचे खड़ा हो गया और ऊपर देखने लगा। काफी ऊँचे पर एक खिड़की खुली और एक अत्यंत सुंदर स्त्री, जिसके बाल बिखरे और वस्त्र मैले और फटे थे, धीरे-धीरे कुछ कहने लगी। खुदादाद ने कान लगा कर सुना। वह कह रही थी, ओ मुसाफिर, यहाँ से फौरन भाग जा, नहीं तो इस भवन का स्वामी तेरी दुर्दशा कर डालेगा। वह महाविकराल नरभक्षी हब्शी है। उस के पंजे में फँसा हुआ आदमी बचता नहीं। वह परदेशियों को पकड़ लाता है, उन्हें एक अँधेरे तहखाने में बंद कर देता है, फिर उन्हें एक-एक करके भून कर खाता है। खुदादाद ने पूछा, तुम कौन हो? स्त्री बोली, मैं काहिरा की रहनेवाली हूँ। बगदाद जा रही थी। इस वन से निकल रही थी कि यही हब्शी आ गया। इस ने मेरे सेवकों को मार डाला और मुझे इस जगह बंद कर दिया। वह मुझ से भोग करना चाहता है किंतु मैं बचती रही हूँ। आज मैं ने उस की बात नहीं मानी तो वह मुझे मार डालेगा। मैं उस का साथ करने से मर जाना पसंद करती हूँ। किंतु तुम क्यों जान देना चाहते हो? तुम भाग जाओ। वह भटके हुए मुसाफिरों को ढूँढ़ने गया है ताकि अपनी खाद्य सामग्री बढ़ाए। वह आता ही होगा। उस की दृष्टि तीक्ष्ण है, वह बहुत दूर से देख लेता है। तुम चले जाओ।

सुंदरी खुदादाद से यह सब कह ही रही थी कि वह राक्षस जैसा मनुष्य आ पहुँचा। वह पर्वताकार लगता था और बहुत ऊँचे तुरकी घोड़े पर बैठा था। उस की तलवार इतनी भारी थी कि उस के अलावा किसी और से उठ ही नहीं सकती थी और उस की गदा कई मन की थी। खुदादाद उसे देख कर डर गया और ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि इस राक्षस से बचा। हब्शी ने उसे तलवार निकाले देखा किंतु उसे तुच्छ जान कर अपने हथियार न सँभाले बल्कि चाहता था कि वैसे ही उसे हाथों से पकड़ ले। यह देख कर खुदादाद ने घोड़ा बढ़ाया और उस के घुटने पर एक तलवार की चोट की। घाव खा कर हब्शी ने घोर गर्जन किया और अपनी भारी तलवार निकाल कर खुदादाद पर चलाई। खुदादाद पैंतरा बदल कर बच गया वरना वहीं खीरे की तरह कट जाता। अब खुदादाद ने अपनी गदा इस कौशल और ऐसे कोण से चलाई कि हब्शी का हाथ ही कट कर गिर गया और वह घोड़े से नीचे आ रहा। खुदादाद झपट कर पहुँचा और अपनी तलवार से हब्शी का सिर उस के शरीर से अलग कर दिया।

वह सुंदरी खिड़की से यह युद्ध देख रही थी और भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि खुदादाद को विजयी बनाए। हब्शी की मृत्यु देख कर खुशी से फूली न समाई और पुकार कर कहने लगी, भगवान की बड़ी दया हुई। अब तुम इसकी कमर से चाबियों का गुच्छा लो और ताला खोल कर मेरे पास आओ।

वह विशाल हब्शी किले की सारी कुंजियाँ अपने पास ही रखा करता था। खुदादाद उस के पास आया। वह सुंदरी उस के पैरों पर गिरने को उद्यत हुई किंतु खुदादाद ने उसे बीच ही में उठा लिया। सुंदरी उस की प्रशंसा करने लगी और बोली कि मैं ने तुम्हारे जैसा वीर पुरुष और कोई नहीं देखा। खुदादाद ने उसे अभी तक दूर से देखा था, पास से देखा तो पहले की अपेक्षा वह कहीं अधिक सुंदर दिखाई दी। वे दोनों बैठ कर बातें करने लगे।

वे दोनों बातें कर ही रहे थे कि एक ओर से चिल्लाने का शब्द सुनाई दिया। खुदादाद ने पूछा, यह आवाज कहाँ से आ रही है और उस का क्या मतलब है? सुंदरी ने कमरे के एक ओर बने हुए दरवाजे की और उँगली उठाई, यानी इशारे से बताया कि आवाज इस दरवाजे के पीछे से आ रही है। और पूछने पर वह बोली, यहाँ एक बड़ा-सा कमरा है। उस हब्शी ने यहाँ बहुत-से मनुष्य कैद कर रखे हैं। नए लोगों को ला कर वह यहीं रखता था और प्रतिदिन वहाँ जा कर एक मनुष्य को चुन कर बाहर लाता था और भून कर खा जाता था।

खुदादाद ने कहा कि मैं उन्हें इस कैद से छुड़ाना चाहता हूँ। वे दोनों उस दरवाजे के पास गए और विभिन्न कुंजियाँ लगा-लगा कर उसे खोलने का प्रयत्न करने लगे। कई कुंजियाँ लगने से ताला देर तक खड़खड़ाता रहा। अंदर से आनेवाली चीख-पुकार और बढ़ गई। खुदादाद को इस बात पर आश्चर्य हुआ कि यह रोना-पीटना क्यों बढ़ गया है। सुंदरी ने कहा कि ताला खड़खड़ाने से वे समझते हैं कि हब्शी आया है और उनमें से किसी को ले जाएगा। उनकी आवाज भी ऐसी थी जैसे किसी गहरे कुएँ के अंदर से आ रही हो। ताला खुलने पर एक लंबा जीना दिखाई दिया। वे उत्तर कर नीचे गए तो देखा कि एक तंग अँधेरी जगह में सौ के लगभग आदमी पड़े हैं जिनके हाथ-पाँव बँधे हैं। खुदादाद बोला, मित्रो, अब भय त्याग दो। भगवान की दया से मैं ने तुम्हारे शत्रु हब्शी को मार डाला है। वे यह सुन कर बड़े खुश हुए।

खुदादाद ने उन के बंधन खोलने शुरू किए। जिनके बंधन खुलते थे वे औरों के भी खोलने लगते थे। इस प्रकार अल्प समय ही में सारे लोग मुक्त हो गए। तहखाने से बाहर निकल कर सबने खुदादाद के पाँव चूमे और उसे आशीर्वाद देने लगे। जब वे महल के बाहर खुले प्रकाश में आए तो खुदादाद ने देखा कि उनमें उस के वे सभी भाई हैं जिन्हें वह ढूँढ़ने निकला था। उस ने कहा, भगवान की बड़ी अनुकंपा है कि तुम लोग सही-सलामत हो। तुम्हारे पिता तुम्हारे वियोग में अति कातर हो रहे हैं। तुम लोगों में से तो कोई राक्षस के पेट में नहीं गया? यह कह कर उस ने उन्हें गिना और शेष समूह से अलग कर दिया। सारे शहजादे एक-दूसरे के गले मिले।

खुदादाद ने सुंदरी से पूछ कर हब्शी के भंडार-गृह का पता लगाया और सब लोगों को भरपेट भोजन कराया। उस ने यह भी देखा कि गोदामों में तरह-तरह की मूल्यवान वस्तुएँ, रत्न, सुगंधियाँ, रेशनी थान, मखमल आदि के ढेर लगे हैं। यह माल हब्शी ने व्यापारियों से लूटा था जिन्हें वह तहखाने के लिए पकड़ लाता था। उस गोदाम में सारे मुक्त बंदियों को ले जा कर खुदादाद ने कहा कि अपना-अपना माल उठा लें। सबने अपनी-अपनी गठरियाँ लीं तो खुदादाद ने शेष वस्तुओं में से भी अधिकांश उन्हें बाँट दीं। किंतु उस ने कहा कि इस सुनसान वन में से तुम लोग इन चीजों को ले कैसे जाओगे। उन्होंने कहा, यह हब्शी हमारे ऊँट और खच्चर भी पकड़ लाता था। वे कहीं बँधे होंगे।

खुदादाद पशुशाला में गया तो उस ने सैकड़ों ऊँटों और खच्चरों के अलावा शहजादों के घोड़े भी बँधे देखे। उनकी रखवाली हब्शी सेवक करते थे। वे सब इन बंदियों को छूटा देख कर समझ गए कि हमारा हब्शी मालिक मारा गया। वे सब जान बचा कर इधर- उधर भाग गए। खुदादाद ने उन्हें जाने दिया। फिर खुदादाद ने उस सुंदरी से कहा, तुम्हें यह हब्शी कहाँ से लाया था? हम तुम्हें वहीं पहुँचा देंगे। यह हैरन के शहजादे तो तुम्हारे देश को जानते ही होंगे, वही तुम्हें पहुँचा देंगे।

लड़की बोली, यह मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि मैं काहिरा की रहनेवाली हूँ। तुमने मेरी जान और इज्जत बचाई, इस के लिए तुम्हारी अति आभारी हूँ। मैं अपना और हाल क्या बताऊँ। बस इतना काफी है कि मैं भी एक शहजादी हूँ। एक दुष्ट ने मेरे पिता को मार डाला और उस के देश को लूट लिया। मैं वहाँ से भागी और यहाँ आ कर इस राक्षस जैसे हब्शी के हाथ पड़ गई। इस पर खुदादाद तथा अन्य शहजादों ने जोर दिया तो वह अपना विस्तृत वृत्तांत इस प्रकार बताने लगी।

हिंदी साहित्य मार्गदर्शन पर प्रकाशित अन्य प्रसिद्ध "सम्पूर्ण " सीरीज भी पढ़ें:

COMMENTS

BLOGGER
Name

​,3,A.P.J. Abdul Kalam,1,Abraham Lincoln,3,Acharya Vinoba Bhave,1,Administration,1,Advertisements,1,Akbar-Beerbal,2,Albert Einstein,2,Alibaba,1,Alif Laila,52,Amit Sharma,10,Anger,1,Ankesh Dhiman,10,Anmol Vachan,5,Anmol Vichar,4,Arts,1,Ashfakullah Khan,1,Atal Bihari Vajpayee,3,AutoBiography,4,Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,1,Baital Pachchisi,27,Bal Gangadhar Tilak,2,Benjamin Franklin,1,Best Wishes,17,BestArticles,12,Bhagat Singh,4,Bhagwat Geeta,2,Bharat Ratna,2,Bhartrihari Neeti Shatak,35,Bheeshma Pitamah,1,Bill Gates,2,Biography,4,Bruce Lee,1,Business,1,Business Tycoons,2,Chanakya Neeti,56,Chanakya Quotes,53,Chanakya Sutra,3,Chhatrapati Shivaji,1,Children Stories,6,Company,1,Concentration,2,Confucius,3,Constitution Of India,1,Courage,1,Crime,1,Curiosity,1,Daily Quotes,13,Deenabandhu C.F. Andrews,1,Deepa Karmakar,1,Deepika Kumari,1,Democracy,1,Desire,2,Dinesh Karamchandani,2,Downloads,19,Dr. B. R. Ambedkar,1,Dr. Suraj Pratap,1,Dr.Harivansh Rai Bachchan,6,Drama,1,Dushyant Kumar,3,Dwarika Prasad Maheshwari,1,E-Book,1,Education,1,Education Quotes,4,Elephants and Hares Panchatantra Story In Hindi ~ गजराज और चतुर खरगोश की कथा,1,Enthusiasm,2,Entrepreneur,1,Essay,3,Experience,1,Fearlessness,1,Fidel Castro,1,Gautam Buddha,10,Gautam Buddha Stories,1,Gautam Kumar Mandal,1,Gazals,16,Gift,2,Government,1,Great Lives,33,Great Poems,87,Great Quotations,177,Great Speeches,10,Great Stories,516,Guest Posts,79,Happiness,3,Hard Work,1,Health,2,Helen Keller,1,Hindi Essay,2,Hindi Novels,3,Hindi Poems,111,Hindi Quotes,135,Hindi Shayari,16,Holi,1,Honesty,1,Honour & Dishonour,1,Hope,2,Idioms And Phrases,11,Ignorance,1,Ikbal,3,India,3,Indian Army,1,Indira Gandhi,1,Iqbal,3,Ishwar Chandra Vidyasagar,3,Jack Ma,1,Jaiprakash,1,Jan Koum,2,Jatak Tales,6,Javed Akhtar,1,Julius Caesar,1,Kabeer Ke Dohe,12,Kashmir,1,Katha,6,Kavish Kumar,1,Keshav Kishor Jain,1,Khalil Zibran,1,Kindness,2,Lal Bahadur Shastri,1,Language,1,Lao-Tzu,1,Law & Order,1,Leo Tolstoy,13,Leonardo da Vinci,1,Literature,1,Luxury,2,Maa,1,Madhushala,1,Mahabharata,52,Mahabharata Stories,66,Maharana Pratap,1,Mahatma Gandhi,5,Maithilisharan Gupt,6,Makhanlal Chaturvedi,2,Manjusha Pandey,1,Mansarovar,5,Martin Luther King Jr,1,Maths,1,Maya Angelou,1,Mitra Samprapti,3,Mitrabhed,6,Money & Property,1,Mulla Nasaruddin,1,Munawwar Rana,9,Munshi Premchand,29,Mythological Stories,2,Napoleon Bonaparte,2,Navjot Singh Sidhu,1,Nida Fazli,5,Non-Violence,2,Novels,1,Organization,1,OSHO,14,Osho Stories,14,Others,2,Panchatantra,66,Pandit Vishnu Sharma,66,Patriotic Poems,6,Paulo Coelho,1,Personality Development,4,Picture Quotes,16,Politics,1,Power,1,Prahlad,1,Praveen Tomar,1,Premchand,29,Priyam Jain,1,Pt.Madan Mohan Malveeya,1,Rabindranath Tagore,25,Rafi Ahmad Rafi,1,Raghuram Rajan,1,Raheem,3,Rahim Ke Done,3,Raja Bhoj,31,Ram Prasad Bismil,4,Ramcharit Manas,1,Ramdhari Singh Dinkar,17,RashmiRathi,7,Ratan Tata,1,Religion,1,Reviews,1,Rishabh Gupta,1,Robin Sharma,7,Sachin A. Pandey,1,Sachin Tendulkar,1,Sanskrit Shlok,77,Sant Kabeer,12,Saraswati Vandana,1,Sardar Vallabh Bhai Patel,1,Sayings and Proverbs,3,Scientist,1,Self Development,25,Self Forgiveness,2,Self-Confidence,3,Self-Help Hindi Articles,40,Shiv Khera,1,Shivmangal Singh Suman,2,Shrimad Bhagwat Geeta,8,Singhasan Battisi,33,Smartphone Etiquette,1,Social Articles,25,Social Networking,2,Socrates,6,Soordas,1,Spiritual Wisdom,1,Sports,1,Sri Ramcharitmanas,1,Sri Sri Ravi Shankar,1,Steve Jobs,1,Strength,2,Subhash Chandra Bose,3,Subhashit,35,Subhashitani,36,Success Quotes,1,Success Tips,1,Surya Kant Tripathy Nirala,1,Suvichar,3,Swachha Bharat Abhiyan,1,Swami Dayananda,1,Swami Dayananda Saraswati,1,Swami Ram Tirtha,1,Swami Ramdev,10,Swami Vivekananda,22,T. Harv Eker,1,Technology,1,Telephone Do's,1,Telephone Manners,1,The Alchemist,1,The Monk Who Sold His Ferrari,1,Time,2,Top 10,3,Torture,1,Trishneet Aroda,1,Truthfulness,1,Tulsidas,1,Twitter,1,Unknown,1,V.S. Atbay,1,Vastu,1,Victory,1,Vidur Neeti,7,Vijay Kumar Sappatti,2,Vikram-Baital,27,Vikramaditya,29,Vinod Kumar Dave,1,Vishnugupta,3,Vrajbasi Das,1,War,1,Warren Buffett,1,WhatsApp,2,William Shakespeare,1,Wilma Rudolf,1,Winston Churchill,1,Wisdom,1,Wise,1,Yoga,1,अकबर-बीरबल,3,अंकेश धीमान,2,अजीत झा,1,अटल बिहारी वाजपेयी,4,अनमोल वचन,44,अनमोल विचार,2,अबुल फजल,1,अब्राहम लिँकन,1,अभियांत्रिकी,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक चतुर्वेदी,1,अमर सिंह,2,अमित शर्मा,12,अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’,2,अरस्तु,1,अर्नेस्ट हैमिग्व,1,अलबर्ट आईन्सटाईन,1,अलिफ लैला,52,अल्बर्ट आइंस्टाईन,1,अशफाकुल्ला खान,1,अश्वपति,1,आचार्य चाणक्य,22,आचार्य विनोबा भावे,1,इंजीनियरिंग,1,इंदिरा गांधी,1,उद्धरण,42,उद्योगपति,2,उपन्यास,2,ओशो,10,ओशो कथा-सागर,11,कबीर के दोहे,2,कवीश कुमार,1,कहावतें तथा लोकोक्तियाँ,11,कुमार मुकुल,1,कृष्ण मलिक,1,केशव किशोर जैन,1,क्रोध,1,ख़लील जिब्रान,1,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणित,1,गोपाल प्रसाद व्यास,1,गोस्वामी तुलसीदास,1,गौतम कुमार मंडल,2,गौतम बुद्ध,1,चाणक्य नीति,22,चाणक्य सूत्र,24,चार्ल्स ब्लॉन्डिन,1,चीफ सियाटल,1,चैतन्य महाप्रभु,1,जातक कथाएँ,6,जार्ज वाशिंगटन,1,जावेद अख्तर,1,जीन फ्राँकाईस ग्रेवलेट,1,जैक मा,1,टेक्नोलोजी,1,डाॅ बी.के.शर्मा,1,डॉ. बी.आर. अम्बेडकर,1,तकनिकी,2,तानसेन,1,तीन बातें,1,त्रिशनित अरोङा,1,दशहरा,1,दसवंत,1,दार्शनिक गुर्जिएफ़,1,दिनेश गुप्ता 'दिन',1,दीनबन्धु एंड्रयूज,1,दीपा करमाकर,1,दुष्यंत कुमार,3,देशभक्ति,1,द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी,1,नारी,1,निदा फ़ाज़ली,5,नेताजी सुभाष चन्द्र बोस,1,पं. विष्णु शर्मा,66,पंचतंत्र,66,पंडित मदन मोहन मालवीय,1,पीयूष गोयल,1,पौराणिक कथाएं,1,प्रेमचंद,6,प्रेरक प्रसंग,52,प्रेरणादायक कहानी,18,बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय,1,बाल गंगाधर तिलक,1,बिल गेट्स,1,बीन्द्रनाथ टैगोर,1,बीरबल,1,बेंजामिन फ्रैंकलिन,1,बेताल पच्चीसी,7,बैताल पचीसी,21,ब्रूस ली,1,भगत सिंह,2,भर्तृहरि,34,भर्तृहरि नीति-शतक,31,भारत,3,भीम,1,महर्षि वेदव्यास,1,महर्षि व्यास,1,महाभारत,52,महाभारत की कथाएँ,60,महाभारत की कथाएं,47,महावीर,1,माखनलाल चतुर्वेदी,2,मानसरोवर,3,माया एंजिलो,1,मार्टिन लूथर किंग जूनियर,1,मित्र सम्प्राप्ति,3,मुनव्वर राना,9,मुल्ला नसरुद्दीन,1,मुंशी प्रेमचंद,1,मुंशी प्रेमचंद्र,23,मुहावरे,1,मैथिलीशरण गुप्त,6,मोहम्मद अलामा इक़बाल,4,युधिष्ठिर,1,योग,1,रतन टाटा,1,रफ़ी अहमद “रफ़ी”,2,रबीन्द्रनाथ टैगोर,22,रश्मिरथी,7,राज भंडारी,1,राजकुमार झांझरी,1,राजा भोज,8,राजेंद्र प्रसाद,2,राम प्यारे सिंह,1,राम प्रसाद बिस्मिल,4,रामधारी सिंह दिनकर,17,राशि पन्त,3,लाओत्से,1,लाल बहादुर शास्त्री,1,लिओनार्दो दा विंची,1,लियो टोल्स्टोय,13,विक्रमादित्य,29,विजय कुमार सप्पत्ति,4,विनोद कुमार दवे,1,विंस्टन चर्चिल,1,वैज्ञानिक,1,वॉरेन बफे,1,व्यंग,13,व्रजबासी दास,1,शिवमंगल सिंह सुमन,2,शेख़ सादी,1,शेरो-शायरी,1,श्री श्री रवि शंकर,1,श्रीमद्‍भगवद्‍गीता,7,सचिन अ. पाण्डेय,1,सचिन कमलवंशी,2,सिंहासन बत्तीसी,33,सूरदास,1,सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला,1,हरिवंशराय बच्चन,6,हिंदी व्याकरण,1,
ltr
item
हिंदी साहित्य मार्गदर्शन: शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कहानी ~ अलिफ लैला
शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कहानी ~ अलिफ लैला
शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कथा,Shahzada Khudadaad Aur Dariyabad Ki Shahzadi Ki Katha, Khudadaad Aur Dariyabad ki Shahzadi ki kahani
हिंदी साहित्य मार्गदर्शन
http://www.hindisahityadarpan.in/2017/10/khudadad-dariyabar-shahjadi-story-in-hindi.html
http://www.hindisahityadarpan.in/
http://www.hindisahityadarpan.in/
http://www.hindisahityadarpan.in/2017/10/khudadad-dariyabar-shahjadi-story-in-hindi.html
true
418547357700122489
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy