50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi

50 अनमोल वचन हिंदी में | 50 Great Quotations In Hindi,anmol vachan,anmol vichar,hindi quotes,suvichar

50 Suvichar In Hindi| 50 Anmol Vachan In Hindi

1. जिसने  ज्न्यान  को  आचरण  में  उतार  लिया , उसने  ईश्वर  को  मूर्तिमान  कर  लिया  – विनोबा भावे 

2. अकर्मण्यता  का  दूसरा  नाम  मर्त्यु  है  – मुसोलिनी

3. पालने  से  लेकर  कब्र  तक  ज्ञान  प्राप्त  करते  रहो  – पवित्र कुरान

4. इच्छा  ही  सब  दूखो   का  मूल  है  – गौतम बुद्ध

5. मनुष्य  का  सबसे  बड़ा  शत्रु  उसका  अज्न्यान  है  – चाणक्य

6. आपका  आज  का  पुरुषार्थ  आपका  कल  का  भाग्य  है  – पालशिरू

7. क्रोध  एक  किस्म  का  क्षणिक  पागलपन  है  – महात्मा  गांधी

8. ठोकर  लगती  है  और  दर्द  होता  है  तभी  मनुष्य  सीख  पाटा  है  – महात्मा  गांधी

9. अप्रिय  शब्द  पशुओ  को  भी  नहीं  सुहाते  है  – गौतम बुद्ध

10. नरम  शब्दों  से  सख्त  दिलो  को  जीता  जा  सकता  है  – सुकरात

11. गहरी  नदी  का  जल  प्रवाह  शांत  व  गंभीर  होता  है  – शेक्सपीयर

12. समय  और  समुद्र  की  लहरे  किसी  का  इंतज़ार  नहीं  करती  – अज्ञात

13. जिस  तरह  जौहरी  ही  असली  हीरे  की  पहचान  कर  सकता  है , उसी  तरह  गुनी  ही  गुणवान  की  पहचान  कर  सकता  है  – कबीर

14. जो  आपको  कल  कर  देना  चाहिए  था , वही  संसार  का  सबसे  का थीं  कार्य  है  – कन्फ्यूशियस

15. ज्ञानी   पुरुषो  का  क्रोध  भीतर  ही , शान्ति  से  निवास  करता  है , बाहर  नहीं  – खलील  जिब्रान

16. कुबेर  भी  यदि  आय  से  अधिक  व्यय  करे  तो  निर्धन  हो  जाता  है  – चाणक्य

17. डूब  की  तरह  छोटे  बनाकर  रहो . जब  घास -पात  जल  जाते  है  तब  भी  डूब  जस  की  तस  बनी  रहती  है  – गुरु  नानक  देव

18. ईश्वर  के  हाथ  देने  के  लिए  खुले  है . लेने  के  लिए  तुम्हे  प्रयत्न  करना  होगा  – गुरु  नानक  देव

19. जो  दूसरो  से  घृणा  करता  है  वह  स्वय  पतित  होता  है  – स्वामी विवेकानंद

20. जो  जैसा  शुभ  व  अशुभ  कार्य  करता  है , वो  वैसा  ही  फल  भोगता  है  – वेदव्यास 

21. मनुष्य  की  इच्छाओ  का  पेट  आज  तक  कोइ  नहीं  भर  सका  है  – वेदव्यास

22. नम्रता  और  मीठे  वचन  ही  मनुष्य  के  सच्चे  आभूषण  होते  है  – तिरूवल्लुवर 

23. खुदा  एक  दरवाजा  बंद  करने  से  पहले  दूसरा  खोल  देता  है , उसे  प्रयत्न  कर  देखो  – शेख  सादी

24. बुरे  आदमी  के  साथ  भी  भलाई  करनी  चाहिए  – कुत्ते  को  रोटी  का  एक  टुकड़ा  डालकर  उसका  मुंह  बंद  करना  ही  अच्छा  है  – शेख  सादी

25. अपमानपूर्वक  अमरत  पीने  से  तो  अच्छा  है  सम्मानपूर्वक  विषपान  – रहीम 

26. थोड़े  से  धन  से  दुष्ट  जन  उन्मत्त  हो  जाते  है  – जैसे  छोटी , बरसाती  नदी   में  थोड़ी  सी  वर्षा  से  बाढ़  आ  जाती  है  – गोस्वामी  तुलसीदास 

27. ईश  प्राप्ति  (शान्ति ) के  लिए  अंत: कारन  शुद्ध  होना  चाहिए  – रविदास 

28. जब  मई  स्वय  पर  हँसता  हूँ  तो  मेरे  मन  का  बोज़  हल्का  हो  जाता  है  – टैगोर 

29. जन्म  के  बाद  मर्त्यु , उत्थान  के  बाद  पतन , संयोग  के  बाद  वियोग , संचय  के  बाद  क्षय  निश्चित  है . ज्ञानी इन  बातो  का  ज्न्यान  कर  हर्ष  और  शोक  के  वशीभूत  नहीं  होते  – महाभारत 
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30. जननी  जन्मभूमि  स्वर्ग  से  भी  बढाकर  है - अज्ञात

31. भरे  बादल  और  फले  वर्कश  नीचे  ज़ुकारे  है , सज्जन  ज्न्यान  और  धन  पाकर  विनम्र  बनाते  है - अज्ञात

32. सोचना, कहना  व  करना  सदा   सम्मान  हो - अज्ञात

33. न   कल  की  न  काल  की  फिकर  करो , सदा  हर्षित  मुख  रहो - अज्ञात

34. स्व  परिवर्तन  से  दूसरो  का  परिवर्तन  करो - अज्ञात

35. ते  ते  पाँव   पसारियो   जेती  चादर  होय - अज्ञात

36. महान  पुरुष  की  पहली  पहचान  उसकी  विनम्रता  है - अज्ञात

37. बिना  अनुभव  कोरा  शाब्दिक  ज्न्यान  अँधा  है - अज्ञात

38. क्रोध  सदैव  मूर्खता   से  प्रारम्भ  होता  है  और  पश्चाताप  पर  समाप्त - अज्ञात

39. नारी  की  उन्नति  पर  ही  राष्ट्र  की  उन्नति  निर्धारित  है - अज्ञात

40. धरती  पर  है  स्वर्ग  कहा  – छोटा  है  परिवार  जहा - अज्ञात

41. दूसरो  का  जो  आचरण  तुम्हे  पसंद  नहीं , वैसा  आचरण  दूसरो  के  प्रति  न  करो - अज्ञात

42. नम्रता  सारे  गुणों  का  दर्द  स्तम्भ  है - अज्ञात

43. बुद्धिमान  किसी  का  उपहास  नहीं  करते  है - अज्ञात

44. हर  अच्छा  काम  पहले असंभव  नजर  आता  है - अज्ञात

45. पुस्तक  प्रेमी  सबसे  धनवान  व  सुखी  होता  है - अज्ञात

46. सबसे   उत्तम  बदला  क्षमा  करना  है - अज्ञात

47. आराम  हराम  है - अज्ञात

48. दो  बच्चो  से  खिलाता  उपवन , हंसते -हंसते  कटता  जीवन - अज्ञात

49. अगर  चाहते  सुख  समर्द्धि , रोको  जनसंख्या  वर्द्धि - अज्ञात

५०. कार्य  मनोरथ  से  नहीं , उद्यम  से  सिद्ध  होते  है . जैसे  सोते  हुए  सिंह  के  मुंह  में  मुर्गे अपने  आप  नहीं  चले  जाते  – विष्णु  शर्मा 

नोट:  हिंदी में अनुवाद करने में  सावधानी बरतने के बावजूद कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं. कृपया क्षमा करें.
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COMMENTS

BLOGGER: 22
  1. उत्तर
    1. जो महापुरुष प्रचार-कार्य के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं, वे उन महापुरुषों की तुलना में अपेक्षाकृत अपूर्ण हैं, जो मौन रहकर पवित्र जीवनयापन करते हैं और श्रेष्ठ विचारों का चिंतन करते हुए जगत् की सहायता करते हैं।

      हटाएं
  2. Thank you everyone for your kind words and encouragements..

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी विचार बहुत ही सुन्दर और प्रभावित करने वाले हैं। कृपा ऐसे ही लिखते रहिये।
    अनमोल वचन

    जवाब देंहटाएं
  4. Viren dhaila6/10/2015 5:35 am

    आप नें बहुत सुन्दर लिखा हैं

    जवाब देंहटाएं
  5. aapke vichar dil ko chhune bale h, aur hmare jeevan me bahut upyogi h,

    जवाब देंहटाएं
  6. बेनामी3/11/2018 6:53 am

    Saved as a favorite, I love your site!

    जवाब देंहटाएं
  7. बेनामी1/22/2020 8:12 pm

    आपका आज का पुरुषार्थ आपका कल का भाग्य है – पालशि

    जवाब देंहटाएं
  8. आपकी पोस्ट बहुत थी

    इसे हमारे साथ साझा करने के लिए

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
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