Quotes By Acharya Balkrishna In Hindi ~ आचार्य बालक्रष्ण के अनमोल विचार |

Acharya Balkrishna quotes in hindi,Hindi quotes by Acharya Balkrishna


गुण और दोष प्रत्येक व्यक्ति में होते हैं, योग से जुडने के बाद दोषों का शमन हो जाता है और गुणों में बढोतरी होने लगती है।
-आचार्य बालक्रष्ण

घ्रणा करने वाला निन्दा, द्वेष, ईर्ष्या करने वाले व्यक्ति को यह डर भी हमेशा सताये रहता है कि जिससे मैं घ्रणा करता हूँ कहीं वह भी मेरी निन्दा व मुझसे घ्रणा न करना शुरु कर दे।  
-आचार्य बालक्रष्ण

निन्दक दूसरों के आर-पार देखना पसन्द करता है, परन्तु खुद अपने आर-पार देखना नहीं चाहता।  
-आचार्य बालक्रष्ण

असंयम की राह पर चलने से आनन्द की मंजिल नहीं मिलती।  
-आचार्य बालक्रष्ण

मेरे पूर्वज, मेरे स्वाभिमान।  
-आचार्य बालक्रष्ण

गुणों की व्रध्दि और क्षय तो अपने कर्मों से होता है।  
-आचार्य बालक्रष्ण

सज्जन व कर्मशील व्यक्ति तो यह जानता है कि शब्दों की अपेक्षा कर्म अधिक जोर से बोलते हैं। अत: वह अपने शुभकर्म में ही निमग्न रहता है।
-आचार्य बालक्रष्ण

जो किसी की निन्दा स्तुति में ही अपने समय को बर्बाद करता है वह बेचारा दया का पात्र है, अबोध है।
 -आचार्य बालक्रष्ण

आयुर्वेद हमारी मिट्टी हमारी संस्कृति व प्रक्रति से जुडी हुई निरापद चिकित्सा पध्दति है।  
-आचार्य बालक्रष्ण

 शरीर स्वस्थ और निरोग हो तो ही व्यक्ति दिनचर्या का पालन विधिवत कर सकता है, दैनिक कार्य और श्रम कर सकता है।
-आचार्य बालक्रष्ण

आयुर्वेद वस्तुत: जीवन जीने का ज्ञान प्रदान करता है, अत: इसे हम धर्म से अलग नहीं कर सकते। इसका उद्देश्य भी जीवन के उद्देश्य की भांति चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति ही है।  
-आचार्य बालक्रष्ण

आनन्द प्राप्ति हेतु त्याग व संयम के पथ पर बढना होगा।
-आचार्य बालक्रष्ण

जब आत्मा मन से, मन इन्द्रिय से और इन्द्रिय विषय से जुडता है, तभी ज्ञान प्राप्त हो पाता है।  
-आचार्य बालक्रष्ण

जो मनुष्य मन, वचन और कर्म से, गलत कार्यो से बचा रहता है, वह स्वयं भी प्रसन्न रहता है।
-आचार्य बालक्रष्ण

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COMMENTS

BLOGGER: 2
  1. शुक्रगुजार हूँ आपका कि आपने आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार में अपने जीवन को हमारी गौरवमयी, सर्वश्रेष्ठ व उद्धारक सांस्कृतिक परंपराओं के पुनरुत्थान के महान तप में आहूत करने की दृढ इच्छाशक्ति एवं व्यक्ति मात्र के प्रति अपार श्रद्धा व करुणा से परिपूर्ण हृदय के स्वामी परम श्रद्धेय श्री आचार्य बाल्कृष्ण जी के जीवन की कसौटी पर कसे हुए और चिरकालिक विचारों को अपने ब्लॉग में स्थान देकर विचार रूपी मोतियों की माला में एक और मोती जड दिया है।
    आपका साभार एवं कोटिशः अभिनंदन।

    जवाब देंहटाएं
  2. Thanks a lot Jaiprakash Ji. Aapke comments hamesh hamara utsah badhate hain. Apne comments hame yun hi dete rahen..

    जवाब देंहटाएं
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