छोटी-छोटी बाधाओं को पहाड़ ना समझें, बिना समय गंवाएं उनसे लड़ें !

Best Moral Story in Hindi about obstacles in life and how to handle them.

Hindi Story About Farmer and Obstacle

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एक किसान था. उसके खेत में एक पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा और इस बार वही हुआ, किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया. किसान क्रोधित हो उठा, और उसने निश्चय किया कि आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.

वह तुरंत गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा और बोल, ” यह देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे आज उखाड़कर खेत के बाहर फ़ेंक देना है.” और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर यह क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था कि पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा , “क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”
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किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था ! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुकसान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता .

हम भी कई बार ज़िन्दगी में आने वाली छोटी-छोटी बाधाओं को बहुत बड़ा समझ लेते हैं और उनसे निपटने की बजाय तकलीफ उठाते रहते हैं. ज़रुरत इस बातकी है कि हम बिना समय गंवाएं उन मुसीबतों से लडें , और जब हम ऐसा करेंगे तो कुछ ही समय में चट्टान सी दिखने वाली समस्या एक छोटे से पत्थर के समान दिखने लगेगी जिसे हम आसानी से हल पाकर आगे बढ़ सकते हैं.

P.S. अगर आप भी अपनी रचनाएँ(In Hindi), कहानियाँ (Hindi Stories), प्रेरक लेख(Self -Development  articles in Hindi ) या कवितायेँ लाखों लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं तो हमसे nisheeth@hindisahityadarpan[dot ]in  पर संपर्क करें !! 

COMMENTS

BLOGGER: 9
  1. सुन्दर और सार्थक कहानी।। आभार।।

    नई कड़ियाँ : सदाबहार अभिनेता देव आनंद

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  2. मन के जड़त्व को तोडती सार्थक बोध कथा।

    मन जीते जगजीत ,मन के हारे हार है मन के जीते जीत।

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  3. निशीथ भाई आपकी द्रुत टिप्पणी और सार्थक लेखन के लिए आपका शुक्रिया बधाई भी।

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  4. रजनी सडाना10/01/2013 8:39 am

    एक प्रेरक एवं रोचक कहानी |कहते हैं कि हमें कोई भी भय तब तक ही उद्विग्न करता है जब तक वह हमारे सम्मुख आ खड़ा नहीं होता |भय के सामने आने पर ,उसका मुकाबला करने पर वह भय हमारे साहस से छोटा पड़ जाया करता है इसलिए हम अपने मनोबल को बनाये रखें ,दुःख-सुख तो जीवन में धूप -छाँव की तरह आते-जाते रहते हैं |धैर्य बनाये रखने की ही तो ज़रूरत है मित्रों |
    आभार
    रजनी सडाना

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  5. nice story i love to see u at my web www.winconfirm.com

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