" कतराते हैं आईने "- मंजूषा पांडे

जीवन   के   होते   महंगे   दामों   के   बीच   मौत   हो   रही   इतनी   सस्ती   है   अविश्वास   के   इस   माहौल   में   क्रूरता   हर  ...

जीवन के होते महंगे दामों के बीच 
मौत हो रही इतनी सस्ती है 
अविश्वास के इस माहौल में 
क्रूरता हर दूसरी आँख में बसती है 
कितने भयानक दृश्य हैं 
लग रहे कैसे बोल हैं 
बन्दूक की गोली नहीं जानती 
जीवन कितना अनमोल है 
जाने कैसा युग कैसे लोग
कैसी परम्पराएँ आयी हैं 
जीने को चंद सांसें
वो भी उधार लाई है 
किसने हृदय के प्रांगन में
ऐसा बीज बो दिया 
बढ़ते बढ़ते प्रेम का पेड़
जहरीला हो गया
नफरत और लालच की आग में
क्रोध ने जो भृकुटी तानी 
अपने ही लहू के हर कतरे 
में डूब गयी कोई जिंदगानी 
धर्म मजहब की आग से हैवानियत 
की जो उठी चिंगारी 
जल कर खाक हुई इंसानियत 
बेचारी

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वोह एक दिन मुठ्ठी में लिए 
दरवाजे पर हर रोज
कोई दस्तक देता है 
आज मेरा है कल तुम्हारा होगा 
सोच कर मन दहशत में रो देता है 
बेहतर जीवन जीने की ललक 
पर बेहतर होने के क्या है मायने 
अब जब भी नजरें मिलाना चाहूं 
 जाने क्यों कतराते हैं आईने 

-मंजूषा पांडे 

कवि परिचय  

नाम   : मंजूषा पांडे
जनम : 24 अगस्त
स्थान : कुल्लू , हिमाचल प्रदेश
शिक्षा :  हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय शिमला से राजनितिक शास्त्र में M .A

गूगल पर कविता ब्लॉग :

स्थायी पता - # 2059 ,जलवायु विहार,सेक्टर - 67 मोहाली, चंडीगढ़

email : manjushan563@gmail.com
            manjushanegi@yahoo.com

संछिप्त परिचय : हिंदी साहित्य से लगाव बचपन से ही रहा ,जब भी अवसर मिलता अपनी अभिव्यक्ति को शब्दों का रूप दे देती  | मुझे कविता और गजलें लिखना बेहद पसंद है  कहानियां और लेख लिखना कुछ समय बाद शुरू किया | वर्तमान में लेखन मेरे जीवन का अहम् हिस्सा बन गया है

पत्रिका में प्रकाशित रचनाएँ :
परिंदे "एहसास की उड़ान " , "गर्भनाल " "आवाज प्लस" ,"व्यवहारिक अध्यात्म" ,"हिमतरू"

अगर आप भी लिखने का हुनर रखते  हैं और अपनी रचनाएँ यहाँ प्रकाशित करना चाहते हैं  हमें संपर्क करें। 

P.S. अगर आप भी अपनी रचनाएँ(In Hindi), कहानियाँ (Hindi Stories), प्रेरक लेख(Self -Development  articles in Hindi ) या कवितायेँ लाखों लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं तो हमसे nisheeth@hindisahityadarpan[dot ]in  पर संपर्क करें !! 

COMMENTS

BLOGGER: 6
  1. Aahat Bhaavnaao Ko Shabd Deti Kavita Ki Yah 'Manjoosha' Hriday Ki Gahraaiyon Ke Aansu Roopi Moti - Maaniko Ko Sanjoye Hue Hai..
    Shreshth Rachna.. Manjusha DiDi..

    जवाब देंहटाएं
  2. बंदूक की गोली नहीं जानती, तीवन कितना अनमोल हैं .....सच के साथ खडी हैंआपकी कविता
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. BAAHUT ACHCHHA KAVITA HAI VERY VERY THANKS FOR THIS POEM

    जवाब देंहटाएं
  4. VERY NICE AND VERY VERY THANKS FOR THIS POEM

    जवाब देंहटाएं
  5. बेनामी1/28/2014 11:05 pm

    sach much yeh kavita bahut achhi h .mera mana h ki desh me jo krurta ,dushmani ki bij ko khatm karne ke lia bachpan se hi bacho ko achhi siksa deni chahia

    जवाब देंहटाएं
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