जीवन के विभिन्न पहलुओं पर महापुरुषों के सुविचार ~ भाग 4

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 Hindi Quotes & Suvichar By Great People ~ Part 4

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मान, अपमान महापुरुषों  के अनमोल विचार ~ Suvichar About Honour & Dishonour

  • गाली सह लेने के असली मायने है गाली देनेवाले के वश में न होना, गाली देनेवाले को असफल बना देना। यह नहीं कि जैसा वह कहे, वैसा कहना। ~ महात्मा गांधी
  • मान सहित विष खाय के, शम्भु भये जगदीश । बिना मान अमृत पिये, राहु कटायो शीश ॥ ~ कबीर

अर्थ / अर्थ महिमा / अर्थ निन्दा / अर्थ शास्त्र /सम्पत्ति / ऐश्वर्य पर महापुरुषों  के अनमोल वचन~Anmol Vachan About Money & Property 

  • मुक्त बाज़ार ही संसाधनों के बटवारे का सवाधिक दक्ष और सामाजिक रूप से इष्टतम तरीका है।
  • स्वार्थ या लाभ ही सबसे बड़ा उत्साहवर्धक (मोटिवेटर) या आगे बढाने वाला बल है।
  • मुक्त बाज़ार उत्तरदायित्वों के वितरण की एक पद्धति है।
  • सम्पत्ति का अधिकार प्रदान करने से सभ्यता के विकास को जितना योगदान मिला है उतना मनुष्य द्वारा स्थापित किसी दूसरी संस्था से नहीं।
  • यदि किसी कार्य को पर्याप्त रूप से छोटे-छोटे चरणों में बाँट दिया जाय तो कोई भी काम पूरा किया जा सकता है।


व्यापार पर महापुरुषों के सुविचार ~ Hindi Quotes About Business

  • व्यापारे वसते लक्ष्मी । (व्यापार में ही लक्ष्मी वसती हैं) महाजनो येन गतः स पन्थाः । (महापुरुष जिस मार्ग से गये है, वही ( उत्तम) मार्ग है) (व्यापारी वर्ग जिस मार्ग से गया है, वही ठीक रास्ता है)
  • जब गरीब और धनी आपस में व्यापार करते हैं तो धीरे-धीरे उनके जीवन-स्तर में समानता आयेगी। ~ आदम स्मिथ, 'द वेल्थ आफ नेशन्स' में
  • तकनीक और व्यापार का नियंत्रण ब्रिटिश साम्राज्य का अधारशिला थी।
  • राष्ट्रों का कल्याण जितना मुक्त व्यापार पर निर्भर है उतना ही मैत्री, इमानदारी और बराबरी पर। ~ कार्डेल हल्ल
  • व्यापारिक युद्ध, विश्व युद्ध, शीत युद्ध : इस बात की लडाई कि “गैर-बराबरी पर आधारित व्यापार के नियम” कौन बनाये।
  • इससे कोई फ़र्क़ नहीं पडता कि कौन शाशन करता है, क्योंकि सदा व्यापारी ही शाशन चलाते हैं। ~ थामस फुलर
  • आज का व्यापार सायकिल चलाने जैसा है - या तो आप चलाते रहिये या गिर जाइये।
  • कार्पोरेशन : व्यक्तिगत उत्तर्दायित्व के बिना ही लाभ कमाने की एक चालाकी से भरी युक्ति। ~ द डेविल्स डिक्शनरी
  • अपराधी, दस्यु प्रवृति वाला एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास कारपोरेशन शुरू करने के लिये पर्याप्त पूँजी नहीं है।
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राजनीति / शासन / सरकार पर महापुरुषों  के अनमोल विचार ~ Anmol Vichar About Politics, Government & Governance

  • सामर्थ्य्मूलं स्वातन्त्र्यं , श्रममूलं च वैभवम् । न्यायमूलं सुराज्यं स्यात् , संघमूलं महाबलम् ॥ (शक्ति स्वतन्त्रता की जड है, मेहनत धन-दौलत की जड है, न्याय सुराज्य का मूल होता है और संगठन महाशक्ति की जड है।)
  • निश्चित ही राज्य तीन शक्तियों के अधीन है। शक्तियाँ मंत्र, प्रभाव और उत्साह हैं जो एक दूसरे से लाभान्वित होकर कर्तव्यों के क्षेत्र में प्रगति करती हैं। मंत्र (योजना, परामर्श) से कार्य का ठीक निर्धारण होता है, प्रभाव (राजोचित शक्ति, तेज) से कार्य का आरम्भ होता है और उत्साह (उद्यम) से कार्य सिद्ध होता है। ~ दसकुमारचरित
  • दंड द्वारा प्रजा की रक्षा करनी चाहिये लेकिन बिना कारण किसी को दंड नहीं देना चाहिये। ~ रामायण
  • प्रजा के सुख में ही राजा का सुख और प्रजा के हित में ही राजा को अपना हित समझना चाहिये। आत्मप्रियता में राजा का हित नहीं है, प्रजा की प्रियता में ही राजा का हित है। ~ चाणक्य
  • वही सरकार सबसे अच्छी होती है जो सबसे कम शाशन करती है।
  • सरकार चाहे किसी की हो, सदा बनिया ही शाशन करते हैं।

लोकतन्त्र / प्रजातन्त्र / जनतन्त्र पर महापुरुषों  के अनमोल विचार ~ Anmol Vachan About Democracy

  • लोकतन्त्र, जनता की, जनता द्वारा, जनता के लिये सरकार होती है। ~ अब्राहम लिंकन
  • लोकतंत्र इस धारणा पर आधारित है कि साधारण लोगों में असाधारण संभावनाएँ होती है। ~ हेनरी एमर्शन फास्डिक
  • शान्तिपूर्वक सरकार बदल देने की शक्ति प्रजातंत्र की आवश्यक शर्त है। प्रजातन्त्र और तानाशाही में अन्तर नेताओं के अभाव में नहीं है, बल्कि नेताओं को बिना उनकी हत्या किये बदल देने में है। ~ लॉर्ड बिवरेज
  • अगर हम लोकतन्त्र की सच्ची भावना का विकास करना चाहते हैं तो हम असहिष्णु नहीं हो सकते। असहिष्णुता से पता चलता है कि हमें अपने उद्देश्य की पवित्रता में पूरा विश्वास नहीं है।
  • बहुमत का शासन जब ज़ोर-जबरदस्ती का शासन हो जाए तो वह उतना ही असहनीय हो जाता है जितना कि नौकरशाही का शासन। ~ महात्मा गांधी
  • जैसी जनता, वैसा राजा । प्रजातन्त्र का यही तकाजा ॥ ~ श्रीराम शर्मा, आचार्य
  • अगर हम लोकतन्त्र की सच्ची भावना का विकास करना चाहते हैं तो हम असहिष्णु नहीं हो सकते। असहिष्णुता से पता चलता है कि हमें अपने उद्देश्य की पवित्रता में पूरा विश्वास नहीं है।
  • सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा एक बड़ा राष्ट्रीय अपराध है। ~ स्वामी विवेकानंद
  • लोकतंत्र के पौधे का, चाहे वह किसी भी किस्म का क्यों न हो तानाशाही में पनपना संदेहास्पद है। ~ जयप्रकाश नारायण

नियम / क़ानून / विधान / न्याय पर महापुरुषों के सुविचार ~  Suvichar About  Law & Order

  • न हि कश्चिद् आचारः सर्वहितः संप्रवर्तते । (कोई भी नियम नहीं हो सकता जो सभी के लिए हितकर हो) ~ महाभारत
  • अपवाद के बिना कोई भी नियम लाभकर नहीं होता। ~ थामस फुलर
  • थोडा-बहुत अन्याय किये बिना कोई भी महान कार्य नहीं किया जा सकता। ~ लुइस दी उलोआ
  • संविधान इतनी विचित्र (आश्चर्यजनक) चीज़ है कि जो यह् नहीं जानता कि ये ये क्या चीज़ होती है, वह गदहा है।
  • लोकतंत्र - जहाँ धनवान, नियम पर शाशन करते हैं और नियम, निर्धनों पर।
  • सभी वास्तविक राज्य भ्रष्ट होते हैं। अच्छे लोगों को चाहिये कि नियमों का पालन बहुत काडाई से न करें। ~ इमर्शन
  • न राज्यं न च राजासीत्, न दण्डो न च दाण्डिकः । स्वयमेव प्रजाः सर्वा, रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥ (न राज्य था और ना राजा था, न दण्ड था और न दण्ड देने वाला। स्वयं सारी प्रजा ही एक-दूसरे की रक्षा करती थी।)
  • क़ानून चाहे कितना ही आदरणीय क्यों न हो, वह गोलाई को चौकोर नहीं कह सकता। ~ फिदेल कास्त्रो

व्यवस्था पर महापुरुषों  के अनमोल विचार ~ Anmol Vichar About Administration

  • व्यवस्था मस्तिष्क की पवित्रता है, शरीर का स्वास्थ्य है, शहर की शान्ति है, देश की सुरक्षा है। जो सम्बन्ध धरन (बीम) का घर से है, या हड्डी का शरीर से है, वही सम्बन्ध व्यवस्था का सब चीज़ों से है। ~ राबर्ट साउथ
  • अच्छी व्यवस्था ही सभी महान कार्यों की आधारशिला है। ~ एडमन्ड बुर्क
  • सभ्यता सुव्यस्था के जन्मती है, स्वतन्त्रता के साथ बडी होती है और अव्यवस्था के साथ मर जाती है। ~ विल डुरान्ट
  • हर चीज़ के लिये जगह, हर चीज़ जगह पर। ~ बेन्जामिन फ्रैंकलिन
  • सुव्यवस्था स्वर्ग का पहला नियम है। ~ अलेक्जेन्डर पोप
  • परिवर्तन के बीच व्यवस्था और व्यवस्था के बीच परिवर्तन को बनाये रखना ही प्रगति की कला है। ~ अल्फ्रेड ह्वाइटहेड

विज्ञापन पर महापुरुषों  के अनमोल विचार~ Hindi Quote About Advertisements

  • मैं ने कोई विज्ञापन ऐसा नहीं देखा जिसमें पुरुष स्त्री से कह रहा हो कि यह साड़ी या स्नो ख़रीद ले। अपनी चीज़ वह खुद पसंद करती है मगर पुरुष की सिगरेट से लेकर टायर तक में वह दख़ल देती है। ~ हरिशंकर परसाई

शक्ति / प्रभुता / सामर्थ्य / बल / वीरता पर महापुरुषों के सुविचार ~  Suvichar About Power, Courage and Capability 

  • वीरभोग्या वसुन्धरा । (पृथ्वी वीरों द्वारा भोगी जाती है)
  • कोऽतिभारः समर्थानामं , किं दूरं व्यवसायिनाम् । को विदेशः सविद्यानां , कः परः प्रियवादिनाम् ॥ ~ पंचतंत्र
  • जो समर्थ हैं उनके लिये अति भार क्या है ? व्यवस्सयियों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये विदेश क्या है? प्रिय बोलने वालों के लिये कौन पराया है ?
  • खुदी को कर बुलन्द इतना, कि हर तकदीर के पहले । ख़ुदा बंदे से खुद पूछे , बता तेरी रजा क्या है ? ~ अकबर इलाहाबादी
  • कौन कहता है कि आसमा में छेद हो सकता नहीं। कोई पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ।|
  • यो विषादं प्रसहते, विक्रमे समुपस्थिते । तेजसा तस्य हीनस्य, पुरुषार्थो न सिध्यति ॥ (पराक्रम दिखाने का अवसर आने पर जो दुख सह लेता है (लेकिन पराक्रम नहीं दिखाता) उस तेज से हीन का पुरुषार्थ सिद्ध नहीं होता)
  • नाभिषेको न च संस्कारः, सिंहस्य कृयते मृगैः । विक्रमार्जित सत्वस्य, स्वयमेव मृगेन्द्रता ॥ (जंगल के जानवर सिंह का न अभिषेक करते हैं और न संस्कार। पराक्रम द्वारा अर्जित सत्व को स्वयं ही जानवरों के राजा का पद मिल जाता है)
  • जो मनुष्य अपनी शक्ति के अनुसार बोझ लेकर चलता है वह किसी भी स्थान पर गिरता नहीं है और न दुर्गम रास्तों में विनष्ट ही होता है ~ मृच्छकटिक
  • अधिकांश लोग अपनी दुर्बलताओं को नहीं जानते, यह सच है लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अधिकतर लोग अपनी शक्ति को भी नहीं जानते। ~ जोनाथन स्विफ्ट
  • मनुष्य अपनी दुर्बलता से भली-भांति परिचित रहता है, पर उसे अपने बल से भी अवगत होना चाहिये। ~ जयशंकर प्रसाद
  • आत्म-वृक्ष के फूल और फल शक्ति को ही समझना चाहिए। ~ श्रीमद्भागवत 8।19।39
  • तलवार ही सब कुछ है, उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की। ~ गुरु गोविन्द सिंह

युद्ध पर महापुरुषों के सुविचार ~  Suvichar About War & Battle

  • सर्वविनाश ही , सह-अस्तित्व का एकमात्र विकल्प है। ~ पं. जवाहरलाल नेहरू
  • सूच्याग्रं नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव । (हे कृष्ण, बिना युद्ध के सूई के नोक के बराबर भी (ज़मीन) नहीं दूँगा। ~ दुर्योधन, महाभारत में
  • प्रागेव विग्रहो न विधिः । पहले ही (बिना साम, दान, दण्ड का सहारा लिये ही) युद्ध करना कोई (अच्छा) तरीका नहीं है। ~ पंचतन्त्र

प्रश्न / शंका / जिज्ञासा / आश्चर्य पर महापुरुषों के सुविचार ~  Suvichar About Curiosity, Doubts & Questions

  • वैज्ञानिक मस्तिष्क उतना अधिक उपयुक्त उत्तर नहीं देता जितना अधिक उपयुक्त वह प्रश्न पूछता है।
  • भाषा की खोज प्रश्न पूछने के लिये की गयी थी। उत्तर तो संकेत और हाव-भाव से भी दिये जा सकते हैं, पर प्रश्न करने के लिये बोलना जरूरी है। जब आदमी ने सबसे पहले प्रश्न पूछा तो मानवता परिपक्व हो गयी। प्रश्न पूछने के आवेग के अभाव से सामाजिक स्थिरता जन्म लेती है। ~ एरिक हाफर
  • प्रश्न और प्रश्न पूछने की कला, शायद सबसे शक्तिशाली तकनीक है।
  • सही प्रश्न पूछना मेधावी बनने का मार्ग है।
  • मूर्खतापूर्ण-प्रश्न, कोई भी नहीं होते औरे कोई भी तभी मूर्ख बनता है जब वह प्रश्न पूछना बन्द कर दे। ~ स्टीनमेज
  • जो प्रश्न पूछता है वह पाँच मिनट के लिये मूर्ख बनता है लेकिन जो नहीं पूछता वह जीवन भर मूर्ख बना रहता है।
  • सबसे चालाक व्यक्ति जितना उत्तर दे सकता है, सबसे बड़ा मूर्ख उससे अधिक पूछ सकता है।
  • मैं छः ईमानदार सेवक अपने पास रखता हूँ| इन्होंने मुझे वह हर चीज़ सिखाया है जो मैं जानता हू| इनके नाम हैं – क्या, क्यों, कब, कैसे, कहाँ और कौन| ~ रुडयार्ड किपलिंग
  • यह कैसा समय है? मेरे कौन मित्र हैं? यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और क्या हानि? मैं कैसा हूं। ये बातें बार-बार सोचें (जब कोई काम हाथ में लें)। ~ नीतसार
  • शंका नहीं बल्कि आश्चर्य ही सारे ज्ञान का मूल है। ~ अब्राहम हैकेल

सूचना / सूचना की शक्ति / सूचना-प्रबन्धन / सूचना प्रौद्योगिकी / सूचना-साक्षरता / सूचना प्रवीण / सूचना की सतंत्रता / सूचना-अर्थव्यवस्था पर महापुरुषों  के अनमोल विचार~ Anmol Vachan About Information & Broadcasting

  • संचार, गणना (कम्प्यूटिंग) और सूचना अब नि:शुल्क वस्तुएँ बन गयी हैं।
  • ज्ञान, कमी के मूल आर्थिक सिद्धान्त को अस्वीकार करता है। जितना अधिक आप इसका उपभोग करते हैं और दूसरों को बाटते हैं, उतना ही अधिक यह बढता है। इसको आसानी से बहुगुणित किया जा सकता है और बार-बार उपभोग।
  • एक ऐसे विद्यालय की कल्पना कीजिए जिसके छात्र तो पढ-लिख सकते हों लेकिन शिक्षक नहीं ; और यह उपमा होगी उस सूचना-युग की, जिसमें हम जी रहे हैं।
  • गुप्तचर ही राजा के आँख होते हैं। ~ हितोपदेश
  • पर्दे और पाप का घनिष्ट सम्बन्ध होता है।
  • सूचना ही लोकतन्त्र की मुद्रा है। ~ थामस जेफर्सन

अज्ञान पर महापुरुषों  के अनमोल विचार~ Anmol Vachan About Ignorance 

  • अज्ञान जैसा शत्रु दूसरा नहीं। ~ चाणक्य
  • अपने शत्रु से प्रेम करो, जो तुम्हे सताए उसके लिए प्रार्थना करो। ~ ईसा
  • अज्ञानी होना मनुष्य का असाधारण अधिकार नहीं है बल्कि स्वयं को अज्ञानी जानना ही उसका विशेषाधिकार है। ~ राधाकृष्णन
  • अशिक्षित रहने से पैदा ना होना अच्छा है क्योंकि अज्ञान ही सब विपत्ति का मूल है।
  • अज्ञानी के लिए ख़ामोशी से बढकर कोई चीज़ नहीं और यदि उसमे यह समझाने की बुद्धि हो तो वह अज्ञानी नहीं रहेगा। ~ शेख सादी

अतिथि पर महापुरुषों  के अनमोल विचार~ Anmol Vachan About Guests

  • अतिथि जिसका अन्न खता है उसके पाप धुल जाते हैं। ~ अथर्ववेद
  • यदि किसी को भी भूख प्यास नहीं लगती तो अतिथि सत्कार का अवसर कैसे मिलता। ~ विनोबा
  • आवत ही हर्षे नहीं, नयनन नहीं सनेह, तुलसी वहां ना जाइये, कंचन बरसे मेह। ~ तुलसीदास

अत्याचार पर महापुरुषों  के अनमोल विचार~ Hindi Quotes About Torture & Atrocity

  • अत्याचारी से बढ़कर अभागा कोई दूसरा नहीं क्योंकि विपत्ति के समय उसका कोई मित्र नहीं होता। ~ शेख सादी
  • ग़ुलामों की अपेक्षा उनपर अत्याचार करनेवाले की हालत ज़्यादा ख़राब होती है। ~ महात्मा गाँधी
  • अत्याचार करने वाला उतना ही दोषी होता है जितना उसे सहन करने वाला। ~ तिलक

अधिकार पर महापुरुषों  के अनमोल विचार ~ Anmol Vichar About Rights 

  • ईश्वर द्वारा निर्मित जल और वायु की तरह सभी चीजों पर सबका सामान अधिकार होना चाहिए। ~ महात्मा गाँधी
  • अधिकार जताने से अधिकार सिद्ध नहीं होता। ~ टैगोर
  • संसार में सबसे बड़ा अधिकार सेवा और त्याग से प्राप्त होता है। ~ प्रेमचंद

अपराध पर महापुरुषों  के अनमोल वचन ~ Hindi Quotes About Crime

  • दूसरों के प्रति किये गए छोटे अपराध अपने प्रति किये गए बड़े अपराध हैं जिनका फक हमें भुगतना ही होता है। ~ अज्ञात
  • अपराध मनुष्य के मुख पर लिखा होता है। ~ महात्मा गाँधी
  • अपराधी मन संदेह का अड्डा है। ~ शेक्सपीयर

अभिमान पर महापुरुषों  के अनमोल वचन ~ Hindi Quotes About Pride And Self Esteem

  • जरा रूप को, आशा धैर्य को, मृत्यु प्राण को, क्रोध श्री को, काम लज्जा को हरता है पर अभिमान सब को हरता है। ~ विदुर नीति
  • अभिमान नरक का मूल है। ~ महाभारत
  • कोयल दिव्या आमरस पीकर भी अभिमान नहीं करती, लेकिन मेढक कीचर का पानी पीकर भी टर्राने लगता है। ~ प्रसंग रत्नावली
  • कबीरा जरब न कीजिये कबुहूँ न हासिये कोए अबहूँ नाव समुद्र में का जाने का होए। ~ कबीर
  • समस्त महान ग़लतियों की तह में अभिमान ही होता है। ~ रस्किन
  • किसी भी हालत में अपनी शक्ति पर अभिमान मत कर, यह बहुरुपिया आसमान हर घडी हजारों रंग बदलता है। ~ हाफ़िज़
  • जिसे होश है वह कभी घमंड नहीं करता। ~ शेख सादी
  • अभिमान नरक का द्वार है।
  • अभिमान जब नम्रता का महोरा पहन लेता है, तब ज़्यादा ही घृणास्पद होता है। ~ कम्बरलेंद
  • बड़े लोगों के अभिमान से छोटे लोगों की श्रद्धा बड़ा कार्य कर जाती है। ~ दयानंद सरस्वती
  • जिसे खुद का अभिमान नहीं, रूप का अभिमान नहीं, लाभ का अभिमान नहीं, ज्ञान का अभिमान नहीं, जो सर्व प्रकार के अभिमान को छोड़ चुका है, वही संत है। ~ महावीर स्वामी
  • सभी महान भूलों की नींव में अहंकार ही होता है। ~ रस्किन

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COMMENTS

BLOGGER: 2
  1. सभी सुविचार और अनमोल वचन बड़े ही प्रेरणादायक हैं.

    जवाब देंहटाएं
  2. हमें हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि अगर हम उनको देख सकते हैं, तो हम निश्चय ही उनको पूरा भी कर सकते हैं।

    जवाब देंहटाएं
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