भरोसा इक इंसान पे ~ राज भंडारी

भरोसा इक इंसान पे ~ राज भंडारी, Hindi Poem about trusting people,Hindi Poem about trust in people.

hindi poem about trusting people,hindi poem about trust in God.

भरोसा इक इंसान पे

सब साथ यंहा छोड़ जायेंगे, ये मान के चलिए ,
है कौन अपना, और पराया, पहचान के चलिए ,

इस सफर में है खतरे तमाम ये जानते हो आप,
साथ ले के लोग,अपनी यंहा पहचान के, चलिए ,

इक मोड़ के बाद, उठाना पड़ता है खुद बोझा,
बेहतर यही है कि बिना ज्यादा सामान के चलिए,

हसरत सबकी होती है, जल्द हो जाये सफर पूरा,
बिना पालें यूँ कोई उम्मीद या अरमान के चलिए ,

किसी गफलत के मारे भरोसा नहीं करना किसी पे,
मिल जाये खैरख्वाह तो साथ उसी इंसान के चलिए ,

चलिए खुली निगाह से ले दे सब मुसाफिरों का साथ,
करके पूरा यकीं अपने ख़ुदा ओ भगवान पे चलिए !!

~ राज भंडारी 
[ads-post]
कवि परिचय :
मेरा नाम राज भंडारी है ! मैं हाल ही मैं उत्तर रेलवे से वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी के पद से सेवा निवृत हुआ हूँ ! मेरा संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है !                                                                       

नाम:   राज भंडारी !!                                    
जन्मतिथि : ०४ ०४ १९५५                                                                                         
जन्म स्थान : नई दिल्ली !                                                                                        
आवास : सेक़्टर १ वैशाली गाजिआबाद !                                                                                        
शिक्षा : एम ए (लोक प्रशासन ), स्नातकोत्तर डिप्लोमा जर्नलिस्म   

मेरी कई कवितायेँ अलग अलग साइट्स पर पब्लिश होती रही हैं ! विशेष तौर पर, प्रतिष्ठित " साहित्य मंजरी " ने मेरी कई रचनायों को स्थान दे कर मुझे सम्मानित किया है ! खेलों पर मेरे लेख काफी समय से स्पोर्ट्सविकि, व अन्य साइट्स पर छपते रहे हैं. इसके अतिरिक्त मैं "मेरी न्यूज़ " मैं सिटीजन जर्नलिस्ट के तौर पर लिखता रहा हूँ.

अतिथियों द्वारा लिखी गयी अन्य रचनाएँ भी पढ़ें : 

  1. धूमिल तिमिर की एक छाया (A shadow in the night): Part-I
  2. मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना !!
  3. समाचार पत्र ~ समाज का दर्पण या अभिशाप ! News Papers~ Boon Or Bane!
  4. शिष्टाचार ~ कैसा हो हमारा व्यवहार ~ विजय कुमार सप्पत्ति!
  5. माँ तूने जीना सिखाया ~ दिनेश करमचंदानी | Mother's Day Special

COMMENTS

BLOGGER: 4
  1. १प्रेम ही संकटों से लड़ने की शक्ति देता है
    २ जीवन को सही ढंग से जीने की प्रेरणा देता है
    ३ गलत काम करने वाले को सही काम करने की प्रेरणा देता है
    ४सच्चाई को बढ़ावा देता है
    ५जीवन में माधुर्य लाता है
    ६ कठोरता को कोमलता में बदल कर,जीने का मकसद देता है-०अशोक

    जवाब देंहटाएं
  2. है भरोसा गर रब पर तो
    यकीं कर ले अपनी तकदीर पर
    जो खुदा साथ होगा तो
    तुझे डरने की जरुरत नहीं है किसी से....

    जवाब देंहटाएं
आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! अपनी प्रतिक्रियाएँ हमें बेझिझक दें !!

Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content