जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जायेगा!

जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जायेगा!,essay about surgical strike on pak in hindi

गत दिनों जम्मू कश्मीर के उड़ी में हुये कायराना हमले से जहां देश का प्रत्येक नागरिक आहत था वहीं जबावी कार्रवाई के बाद आज देश में एक खुशनुमा महौल बन गया है समस्त देश वासियों को अपने सेना के जवानों पर गर्व है वास्तव में आज उड़ी हमले में शहीद हुये जवानो के परिवारों के कलेजों कुछ न कुछ ठंडक जरूर पहुंची होगी।  

अभी हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई से देश के प्रत्येक नागरिक का सीना अब तो वास्तव में 56 इंच का हो ही गया है। भारतीय सेना ने दिखा दिया कि हमारे सब्र का बांध अब टूट चुका है।  

पाकिस्तान का आने वाला भविष्य ओर भी दुर्भाग्य पूर्ण हो सकता है यदि वह इस प्रकार की नापाक मंसूबों का अंजाम देता है। सेना को मिली कामयाबी के पीछे कहीं न कहीं  हमारे देश के समस्त लोगों की दुआएं व हमारे नेताओं का अहम भूमिका है, जिन्होंने इस खतरनाक मिशन को कराने में सर्व सम्मति से एकजुटता दिखा कर वास्तव में अपने देश भक्त होने का परिचय देश की जनता को दे दिया है।

आज उन्होंने दिखा दिया दिया हम जितना सहन कर सकते थे अब  उसकी सीमा समाप्त हो चुकी है बस अब और नहीं... ओर होना भी चाहिए क्योंकि भारतीय सेना का एक-एक जवान हमारे अपने परिवार से भी अधिक प्रिय है क्योंकि वे देश की सरहद पर देश की आन-बान-शान के लिए ही अपनी जान तक न्यौछावर करने से भी विमुख नहीं होते। वास्तव में उन जवानों के परिवार व सगे संबंधी सभी धन्य धन्य है जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को देश के अंतिम छोर पर देश सेवा के लिए भेजा है।  धन्य है वो मां जिन्होंने अपने लाल को  भारत मां की सेवा के लिए जन्म दिया और धन्य है वो पत्नी जिसने एक शूरयोद्धा जैसा  सुहाग पाया, धन्य है वो बहन जिसने देश की रक्षा करने वाला एक भाई पाया है। 

धन्य है वो पिता जिसने अपने कलेजे पर पत्थर रख कर अपने सपूत को सरहद की रखवाली के लिए भेजा है।

लेखक की रचना की कुछ पाक्तियां जो उपरोक्त वाक्य पर सटिक साबित होती है।

भूप हो अपनी सीमा के।
सीमा रेखा, प्रहरी से बन जाते हो।
पक्षपात किंचित नहीं करते हो।
चरित्र वान,  पिता, अगर हो तो।
सहभागिता, राष्ट्रहित कराते हो।
पे्ररित करें सतकर्मों को तो।
तुम तो संवाहक हिंद कहलाते हो।

अब हमारे देश की जनता व राजनेतओं का भी सैनिकों के प्रति कुछ न कुछ दायित्व बनता है कि हम अपने निजी हितों की सोच से परे अपने देश की सेना के मनोबल में भी कमी न होने दें। यदि भविष्य में पाकिस्तान से युद्ध होता है तो हिंद धरा का प्रत्येक नर-नारी भारतीय सेना के साथ बड़े ही आत्मविश्वास के साथ खड़ा होगा। क्योंकि आज जो हम अपने सदनों मेें चैन की नींद ले रहे है वो सब हमारे वीर जवानों की ही देन है।

लेखक की रचना कुछ पंक्तियां शहीदों के नाम:

शहीद हो, भारत देश पर वीर मेरे।
स्वर्ग से अंतिम रेखा, दिखा नहीं सकता।।
       लाछण लगाये, वीर तुम पर कोई तो?
पीड़ा तुम्हारी, हृदय सह नहीं सकता।।

दूसरी तरफ हम यदि चर्चा करें देश के गद्दारों की, गद्दारी व भ्रष्टाचार एक ही सिक्के के दो पहलू समझे तो गलत नहीं होगा। 

  जो चंद नोटों की खातिर अपने जमीर तक बेच देते है। जिसके चलते वो देश के हित व अनहित के बारे में अपना बुद्धि विवेक सब कुछ खो देते है। जिसका खामियाजा देश को बहुत बड़ी कीमत चुका कर करना पड़ता है। पर देश के गद्दारो को कुछ फर्क नहीं पड़ता न ही उन्हें दर्द महसूस होता है। क्योंकि उन्होंने तो अपना जमीर ही बेच दिया। आये दिन होने वाले देश पर कायराना आतंकी हमले मेें कहीं न कहीं इन तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जितना खतरा हमें बहार से नहीं है जितना कि घर के अंदर बैठे इन सपोलो से है। यदि किसी प्रकार की युक्ति से इन तत्वों पर नकेल लग जाये तो हो सकता है देश का भविष्य हमारे लिए काफी राहत भरा सिद्ध हो। हमारे देश के उ"ा सिंहासन पर आसीन मंत्री महोदयों को चाहिए कि सभी एक जुट होकर ऐसे आस्तीन के सांपों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि उनके मातिष्क में फैले विष को सदा के लिए खत्म किया जा सके। 

वतन हमारा जान से प्यारा।
धरा हिंद के हम वासी है।।
सहन शीलता गुण हमारा।
कभी न दुश्मन से घबराते है।।
आये यदि हम अपनी पर।
कत्र्तव्य निभाना भी आता है।।
बहुत हुआ अब सर से पानी।
हमें क्षमा करना भी नहीं आता है।।
वर्तमान समय हमारे देश की सेना व माननीय मंत्री महोदय को बड़ी बुद्धिमत्ता के साथ विद्यार्थी गुण जैसे स्वाण जैसी नींद व काक जैसी चेष्टा की मांनिद काम करना होगा क्योंकि जितना दुश्मन सक्रिय सीमा पर है उससे Óयादा खतरनाक दुश्मन हमारे देश के अंदर कहीं न कहीं मौजूद है। अब समय है कि पाक को उसी की भाषा में जवाब दिया जाये। दुश्मन को हमेशा अपने से कमजोर नहीं समझने में ही बुद्धि मानी है। वह किसी भी हद को पार कर सकता है। यदि इस गंभीर विषय को बड़ी ही सर्तकता से नहीं लिया गया तो कुछ भी हो सकता है।

लेखक परिचय 
अंकेश धीमान, पुत्र: श्री जयभगवान
बुढ़ाना, मुजफ्फरगनर उत्तर प्रदेश

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licankdhiman@rediffmail.com
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