पीलिया रोग (जॉन्डिस)-कारण, निवारण व उपचार

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 दो शब्द:-

हिंदी साहित्य दर्पण, परिवार को बड़ी ही प्रसन्नता है, कि पाठकों की पुरजोर मांग को ध्यान में रखते हुये, स्वास्थ्य संबंधित लेखों को भी, अपने लक्ष्य में शामिल कर लिया हैं। ताकि देश के, आम जन मानस को भावी बीमारियों के प्रति जागरूक व उनके स्वास्थ्य को, ओर भी बेहतर बनाया जा सके। क्योंकि जागरूकता एक मात्र ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा समय रहते, संभावित बीमारियों से छुटकारा सरलता से पाया जा सकता है।  

अत: हमें अपने पाठकों से उम्मीद ही नहीं, वरण पूर्ण विश्वास है, कि हमारा यह पड़ाव आपको बेहद पसंद आयेगा, जो कि आपके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निवारण में बेहतर सिद्ध होगा।

पीलिया रोग, परिचय:-  

  आज हम ऐसे ही,रोग पर चर्चा करने जा रहे हैं, जिसकी संभावनाएं गर्मी में  शत प्रतिशत बढ़ जाती है। यदि समय रहते, इस रोग का उपचार नहीं किया जाता, तो  रोगी के लिए मृत्यु का मुख्य कारण भी बन सकता है। यह रोग, यकृत अर्थात लीवर को अत्यधिक प्रभावित करने के साथ-साथ रोगी के अन्य शारीरिक भागों को प्रभावित करता है। जिसको हम पीलिया या फिर कामला, जोन्डिस के नाम से भी जान सकते है। उक्त रोग होने पर, रोगी की पाचन शक्ति  धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।  रोगी के शरीर में रक्त का संचारण प्रभावित होने से शरीर में रक्त की कमी आनी आरंभ हो जाता है।  यदि उचित समय  पर  पीलिया का का उपचार नहीं किया जाता तो यह काला पीलिया भी बन  सकता है। जिस कारण रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। यह रोग बच्चों और बड़ों, दोनों में भी, हो सकता है।

पीलिया विभाजन एवं उसके लक्षण:-

1- वात जनित (शारीरिक वायु) :- इस प्रकार के पीलिया में आंखों और पेशाब में बाधा होती है, रोगी के शरीर में सुई सी चुभने जैसी पीड़ा तथा कप, भ्रम (चक्कर आना) के लक्षण दिखाई देते है।

2- पित्त (लीवर में बनने वाला तरल पदार्थ) जनित : - इस प्रकार के पीलिया में आंखें व शरीर की त्वचा पीली होने लगती है। मल पतला होता है, रोगी के शरीर मे जलन, प्यास लगने के साथ-साथ  बुखार के लक्षण भी महसूस होने लगते हैं।  

3- कफ (बलगम) जनित:- रोगी के मुख से कफ आना, शरीर आलस्य मय होना, भारीपन, आँख, मुंह, त्वचा पर सूजन एवं पेशाब में सफेदी के लक्षण का दिखाई देना मुख्य है। 

4- सन्निपात जनित (वात, कफ, पित्त तीनों का मिश्रण) :- इस प्रकार के पीलिया में उक्त  तीनों लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं।  इस पीलिया में रोगी को काफी पीड़ा होती है। पेट के कीड़े, कफ तथा रक्त, के साथ मल में निकलता है।  

इसके अलावा रोगी में  अन्य लक्षण जैसे कि जी मचलना, उल्टी आना, पसलियों में भारीपन व दर्द का होना, पेट में दर्द होना, भूख न लगना, लगातार वजन में कमी होना, सिर में दर्द होना आदी लक्षण भी हो सकते है।    

५- नवजात शिशु, में होने वाला पीलिया:-

यह आमतौर पर हानि रहित होता है,
यह अवस्था अक्सर नवजात शिशुओं में जन्म के दूसरे दिन देखी जा सकती है। यह अवस्था सामान्य प्रसवों में 8 वें दिन तक रहती है , और शिशु का समय से पहले जन्म होने पर, 14 वें दिन तक बनी रहती है। इस रोग की चरम स्थिती में, बच्चों के दिमाग को नुकसान पहुंचने की भी, संभावना हो सकती है। जिस कारण बच्चों का, जीवन भर अपंग होने का भय रहता है। 

रोग की संभावनाएं एवं परीक्षण:-

 यह रोग मुख्य: थैली सीमिया, लिवर में घाव होने, गिल्बर्ट सिंड्रोम, एनीमिया बीमारी, पित्ताशय की पथरी, पेट में गैस बनने, लंबे समय से मलेरिया होने, व्यक्ति द्वारा अधिक मात्रा में शराब का सेवन, बहुत मात्रा में नमक व तीखे पदार्थों का सेवन, दूषित जल का प्रयोग, वायरल इंफेक्शन व शरीर में खून की कमी से यह रोग पनप सकता है।   पीलिया की जांच हेतु, चिकित्सक रोगी को  लिवर के इमेजिंग टेस्ट, एमआरआई स्कैन, पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एन्डोस्कोपिक आदि टेस्ट कराने की सलाह आवश्यकता अनुसार दे  सकते हैं।  

पीलिया  में, आहार की भूमिका:-

पीलिया के रोगियों को चाहिए, कि वे  मैदा की मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया की मिठाइयों से दूरी बनाये रखे।  पीलिया रोगी , उपचार के दौरान, अपने आहार में  ऐसे आहार को शामिल करें, जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हो। रोग से छुटकारा पाने के लिए आहार और जल की शुद्धता रोगी के लिए बेहद जरूरी है।

  जैसे कि -रोगी पपीता, गन्ने का रस, छाछ, गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला खा सकता है, यह रोगी को नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है। 

पीलिया निवारण, सुझाव:-

रोगी को चाहिए, कि वे अपने शरीर के कैलेस्ट्रॉल को घटाएं, शराब से दूरी बनाये रखे, सूर्य से बिटामीन डी ले, योग  करना व सुबह के समय टहलना, अपनी दिनचर्या में शामिल करे। 

पीलिया के उपचार:-

यदि रोगी समय रहते, डॉक्टरी सलाह व दवाईयों के साथ-साथ कुछ, घरेलू उपाय जो भी निम्र में से, आपको सरल लगे तो कर सकते हैं। जिससे आप जल्द ही   स्वस्थ हो सकेंगेे।

  •  प्याज की सलाज को, नीबू के रस में 5 या 6 घंटों के लिये, भिगो दीजिये, उसके बाद प्याज पर नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। रोगी को, दिन में 2 या 3 बार देने से पीलिया जल्दी ही दूर हो जायेगा।  
  •  लीवर सैल्स की सुरक्षा हेतु, दिन में 3-4 बार, निंबू का रस पानी में मिलाकर पीने से, कुछ ही दिनों में आप खुद को पीलिया मुक्त बना सकते है। 
  • टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये इसमें लाइकोपीन प्रचुर मात्र में होता है, जो, कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट है। टमाटर का रस लीवर को स्वास्थ्य बनाने में लाभदायक है। टमाटर रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें, रोगी को अवश्य ही लाभ मिलेगा। 
  •  यदि मकोय की पत्तियों को, पानी में उबालकर सेवन करें, तो पीलिया रोग में, जल्दी ही राहत मिलेगी।  
  •  एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच महीन, त्रिफला रात को भिगो दें। सुबह पानी का कपट छान पीए। कुछ ही दिनों के बाद, रोगी के यकृत की समस्त गंदगी को साफ कर देगा।
  • मूली में विटामिन सी, लोह, कैल्सियम, सोडियम, मैग्रिश्यम और क्लोरीन आदि खनिज होते हंै,  जो कि जिगर की क्रिया को    सुचारु रूप प्रदान करते हैं।   रोगी को 100 मिली मूली का रस में आवश्यकता अनुसार गुुड़ मिलाकर दिन में 3-4 बार देने से बहुत ही लाभ मिलेगा।
  • सुबह, शाम 4 लहसुन को कली को पीसकर आधा कप गर्म दूध में मिलाकर पीने से पीलिया रोग में राहत अवश्य ही मिलेगी।
  • गिलोय के 5 ग्र्राम चूर्ण को रोगी, को शहद में मिलाकर, सुबह शाम देने से पीलिया में राहत मिलेगी। अगर गिलोय ना हो तो काली मिर्च या त्रिफला का चूर्ण भी आप रोगी को दे सकते है।
  •  100 ग्र्राम बड़ी अरहर के छिलके और 100 ग्र्राम मिश्री को मिलकर चूर्ण बनकर 6-6 ग्राम की मात्रा, सुबह शाम खाली पेट ताजे पानी के साथ खाने से पीलिया रोग समाप्त हो जाता है। 

लेखक 

अंकेश धीमान

 बड़ौत रोड़ बुढ़ाना मु.नगर (धीमान इंश्यारेंस) 





COMMENTS

BLOGGER: 3
  1. अंकेश जी, पीलिया के बारेंमे आपने बहुत ही अच्छी तरह और विस्तारपूर्वक जानकारी दी. यह जानकारी सभी को जरुर फायदेमंद साबित होंगी.

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    उत्तर
    1. श्री मान, प्रिय पाठक महोदय,
      आप की प्रतिक्रिया ने हमारे, हौसलों को एक नया आयाम देने की, सराहनीय कोशिश की, अधिक संबंधित जानकारी ग्रहण के लिए अपना प्यार सदा ऐसे ही लुटाते रहेगा, हम आप के सदा, आभारी रहेंगे। धन्यवाद सहित
      अंकेश धीमान

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