कविता आपको हिला देगी ~ यशु जान

पूरे जहान में छोर मचा देगी , मेरी ये कविता आपको हिला देगी , कुछ सवाल करूँगा , जवाब भी दूंगा , लिख़ने से पीछे ना हटूंगा , सारी बात समझा देगी ,


कविता आपको हिला देगी

पूरे जहान में छोर मचा देगी ,
मेरी ये कविता आपको हिला देगी ,
कुछ सवाल करूँगा ,
जवाब भी दूंगा ,
लिख़ने से पीछे ना हटूंगा ,
सारी बात समझा देगी ,
मेरी ये कविता

परीक्षा लेती है जो हमारी ,
कौनसी चीज़ है सबसे भारी ,
नेता लोग हैं उसे उठाते ,
थोड़े दिनों में भूल भी जाते ,
जो अपने घर में उनको प्यारी ,
ऐसी चीज़ है ज़िम्मेदारी ,
तोल सकें ना फिर भी भारी ,
बड़ी है भारी ज़िम्मेदारी ,
देखना उलझनों में फसा देगी ,
मेरी ये कविता

जिसके पास गुणों की खान ,
मुट्ठी में कर लेता जान ,
मन माला की फेरे तस्वी ,
ख़ुदा से ऊंची उसकी पदवी ,
जिसका कोई ना अंत-शुरू ,
उसको बोलते पूर्ण गुरु ,
वही बताए नर्क - पुरु ,
ऐसे होते हैं पूर्ण गुरु ,
उलझी गुत्थी को सुलझा देगी ,
मेरी ये कविता

होते हुए भी जो ना है ,
छूते हैं फिर भी है क्षय ,
प्राणी सिर्फ़ है दुःख ही पाता ,
और किसी का कुछ ना जाता ,
ख़ुदा ने हमें बनाकर खेला ,
कहते हैं जिसे दुनिया का मेला ,
कठपुतली हम यशु वो अकेला ,
कैसा है ये जगत झमेला ,
कर कुछ ना कुछ ग़ुनाह देगी ,
मेरी ये कविता आपको हिला देगी ,
मेरी ये कविता

~ यशु जान

रखो लाज मेरी गुरु नानक

रखो लाज मेरी गुरु नानक,

मेरा परिचय ना खास,

मैं आपका आप हो मेरे,
रहूँ बन चरणों का दास

माया का मैं रोगी लोभी,
उच्च कोटि का वस्तु भोगी,
मुझे इस बवंडर से बचावो,
मेरी एक ही है अरदास,
रखो लाज मेरी गुरु नानक

काली बदली मुझपे छाई,
दुश्मन हुआ है भाई-भाई,
करो उपाय ऐसा सद्गुरु,
टूटे ना मोरी आस,
रखो लाज मेरी गुरु नानक

खेल करे कोई जानबूझकर,
मोहे सताए सूझबूझकर,
यशु जान की विनती सुनो,
बुरा ना होये आभास,
रखो लाज मेरी गुरु नानक,
मेरा परिचय ना खास,
मैं आपका आप हो मेरे,
रहूँ बन चरणों का दास
~ यशु जान



कवि परिचय:


यशु जान (फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और अंतर्राष्ट्रीय लेखक हैं। वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीतकविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। उनकी कविताएं और रचनाएं बहुत रोचक और अलग होती हैं उनकी अधिकतर रचनाएं पंजाबी और हिंदी में हैं और पंजाबी और हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट पे हैं |उनकी एक पुस्तक 'उत्तम ग़ज़लें और कविताएंके नाम से प्रकाशित हो चुकी है आप जे . आर . डी . एम् . नामक कंपनी में बतौर स्टेट हैड काम कर रहे है और एक असाधारण विशेषज्ञ हैं |उनको अलग बनाता है उनका अजीब शौंक जो है भूत-प्रेत से संबंदित खोजें करना,लोगों को भूत-प्रेतों से बचाना,अदृश्य शक्तियों को खोजना और भी बहुत कुछ उन्होंने ऐसी ज्ञान साखियों को कविता में पिरोया है जिनके बारे में कभी किसी लेखक ने नहीं सोचा,सूफ़ी फ़क़ीर बाबा शेख़ फ़रीद ( गंजशकर )राजा जनक,इन महात्माओं के ऊपर उन्होंने कविताएं लिखी हैं 

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