मजा आता ~ जितेन्द्र सुथार

Hindi poem by Jitendra Suthar about women empowerment. Women Empower poem in hindi by Jitendra Suthar


मजा आता
इन गजों के झुंड में तू चींटी थी पर डरती रही,
लक्ष्मीबाई ने कुछ समझाया था पर गुलामी तू उनकी करती रही,
जब अपने बने इन दिमकों को जरा बिखेरती तो मजा आता,
खुद उठकर खुद के लिए लड़ती तो देख हौसला मजा आता ।।

हुकुमदार बने इन मर्दों को जरा सा तू जवाब देती,
क्यों जीना इनकी दो कौड़ी पर खुद के लिए तू खुद कमा लेती,
यह देवी की पूजा करते देवी क्या होती बता देती जरा,
गुलामी जो भरी है दिल में वो लावा से बता देती जरा,
यूं चूल्हों की आग में ना तपकर,बंधी जिंदगी में बेड़ियों से थककर,
तुझे उठता देख मजा आता,
खाली बजते गालों पर तेरे तमाचे देख मजा आता ।।

यूं चार दीवारों की जेल में तू कभी क्यूं थकती नहीं,
ये धुंआधार की रसोई में तू कभी क्यों तपती नहीं,
कल जरा एक काम करना
उस हुकुमदार मर्द को वहां बिठा देना,
सुन!
ये हमदर्दी ना बताना अब कहीं गहराइयों में छिपा देना,
कल खुद के लिए तू निकल पड़ना
देवी कहकर शोषण करते उन्हें वध की भाषा समझा देना,
कल करना कुछ अपने लिए वह देख मुझे जो मजा आता है
हर तरफ नया सूरज उगें तो उस धूप में सकने का मुझे मजा आता ।।
~ जितेन्द्र सुथार

नाम:- जितेन्द्र सुथार
आयु :- 20 वर्ष
व्यवसाय:- विद्यार्थी (विद्युत अभियांत्रिकी)
पता :- रमणियां, सिवाना (राजस्थान)
परिचय  : "मेरा नाम जितेंद्र सुथार है मैं राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव रमणिया का रहने वाला हूं। कविता और कहानियां लिखने का शौख मैंने 15 साल की उम्र में बना लिया था तब मैं कहीं न कहीं कुछ न कुछ लिखता ही रहता था और आज लगभग सौ कविताएं लिख चुका हूं। मैं इतना बड़ा तो नहीं कि समाज को मूल्यांकित कर सकूं परंतु मुझे लगता है कि समाज में कुछ ऐसी कुरितियां है जो आज हमें नीचे दबाए जा रही है और मेरी हमेशा यही कोशिश रही है कि मैं उन चीजों के बारे में लिखूं और समाज कभी ना कभी इसे समझें और अपनाए।"

COMMENTS

BLOGGER: 4
  1. जागिए, जानिये, सोचिए और कुछ बेहतर कीजिए
    अत्यधिक महंगाई, बेरोजगारी, कम आमदनी, संसाधनों की कमी, सरकारी जिम्मेदारियों में आई कमी, लापरवाही, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, संकीर्णता, अतार्किकता, झूठ, कुप्रचार, असभ्यता जैसी तमाम चीजें आज के भारत की सच्चाई हैं। सरकारों से जुड़े लोग जनता को उल्लू बना रहे हैं और अपने तथा अपने लोगों के घर भर रहे हैं और जनता को बदहाल कर रहे हैं। समकालीन भारत में वास्तव में क्या हो रहा है यह जानना और समझना और उसके हिसाब से अपने आपको / समाज को बचाने के लिए जरूरी है कि आप सही सूचनाएं ग्रहण करें। हमारा ऐसा ही प्रयास है। कृपया हमारी वेबसाइट देखें, अपनी राय, समाचार, रचनाएं भेजें। रिपोर्टर बनकर अपनी आमदनी बढ़ाएं हमें भी सहयोग दें।
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  2. humain intjaar tha ki koi lou jalaye to sahi. or intjaar itna ho gaya ki khud ki chingari bhi bujh gayi. fir kisi ne awaaj di chingari he kafi thi tera darr jalane ke liye.

    जवाब देंहटाएं
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