प्रेम की कविताएँ ~ पंकज बिंदास

पंकज बिंदास की प्रेम कविताएँ: सोलर लाइट, तुम, प्रेम का चार्ज और उपेक्षित। रोज़मर्रा के नए बिंबों में प्रेम और उपेक्षा की भावनाएँ।

प्रेम को कहने के लिए हर पीढ़ी अपनी भाषा और अपने बिंब ढूँढती है। युवा कवि पंकज बिंदास की इन चार कविताओं में प्रेम चबूतरे की सोलर लाइट है, गणित का अपरिमेय मान है, मोबाइल का चार्ज है, और उपेक्षा की कसक भी। रोज़मर्रा की चीज़ों से बुने ये बिंब आज के पाठक के बहुत क़रीब हैं।

यह एक अतिथि रचना है। रचनाओं में व्यक्त विचार रचनाकार के अपने हैं।


सोलर लाइट

मेरे जीवन के चबूतरे पर जब भी
उतरती रही शाम
निगलना चाहा अंधकार ने चबूतरे को
तभी चबूतरे पर लगी सोलर लाइट जली
जलती रही रात-भर, अंधेरा छँटने तक
बनाती रही चबूतरे को आसमान में चांद सम
मैं तुम्हें अपने जीवन की सोलर लाइट मानता हूं।

~ पंकज बिंदास

तुम

तुम दर्शन की उस किताब जैसी हो
जिसमें अवधारणाएं सूत्र रूप में पिरोए गये हों
तुम गणित के उस सवाल की भांति हो
जो माना के बिना हल नहीं होता
तुम कुछ रॉकेट साइंस जैसे भी हो
समझने में होता है दिमाग़ खर्च
उस भिन्न की तरह तुम हो
जिसका मान दशमलव के बाद
अनंत तक बढ़ता रहता है
अनंत...
हां आप अनंत जैसे हो अपरिमेय।

~ पंकज बिंदास

प्रेम का चार्ज

जब मोबाइल की बैटरी हो जाए इतनी कम
लो बैटरी का सिम्बल आ जाए
ब्राइटनेस होने लगे ख़ुद ही कम
स्विच ऑफ होने पर उतारू हो मोबाइल
उस वक्त मोबाइल को पूछना कैसा लग रहा है?
मुझे भी वैसा ही लगता है
जिस दिन तुमसे बात नहीं होती
तुम मेरे लिए चार्ज हो
तुमसे महज़ दस मिनट की बात
मेरे दिल को कर देती फुल चार्ज
फिर मुझे वैसा ही लगता है
जैसे फुल चार्ज मोबाइल को लगता होगा।

~ पंकज बिंदास

उपेक्षित

मेरी नियति को कोई
उपेक्षाओं की कालिख से
पोतकर चला गया बेतरतीब
उस कालिख से मेरा मुर्दा भरोसा
सड़ांध छोड़ रहा असहनीय।
मैं किसी किताब का
परिशिष्ट हिस्सा हूं
प्रेम के सिलेबस का
ऐच्छिक विषय हूं
वैकल्पिक प्रश्न का
कोई एक विकल्प हूं
अनिवार्य नहीं रहा मैं
कभी किसी के लिए।
मेरी भावनाओं को रोस्ट करके
अपने मन के ढाबे पर
वो खिलाती रही अपने किसी ख़ास को
अपने अनुसार चाट- मसाले लगाकर।

~ पंकज बिंदास


परिचय: पंकज बिंदास

उत्तराखंड की प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित माँ अलकनंदा और माँ मंदाकिनी नदियों के बीच स्थित भगवान कार्तिकेय और माता नैणी देवी की छत्रछाया में गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जनपद में आगर गाँव स्थित है। जहाँ 18 अगस्त 1997 को श्री जसपाल सिंह नेगी और श्रीमती छोटी देवी की द्वितीय संतान के रूप में पंकज बिंदास का जन्म हुआ, इनका बचपन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित और संपन्न कराते बीता,जो इनकी रचनात्मक का द्योतक है।प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में हुई तत्पश्चात हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज घिमतोली से पूरी की। कवि हृदय इन्हें बचपन से मिला था,सो बचपन से ही कविताएं लिखने का सिलसिला शुरू हुआ, प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा मिला की प्रकृति-प्रेमी हो गए तथा साहित्य में गहरी रुचि पैदा हुई।

परिणामस्वरूप हेमती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में पंकज बिंदास हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएचडी कर रहे हैं। विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो रही हैं, जिनमें- अभ्युदय,आकाश कविघोष, प्रांजल,कलश, मनसंगी आदि प्रमुख हैं।

साहित्यिक विधाएं- कविता (छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों),गीत, ग़ज़ल, कहानी, संस्मरण, छंदबद्ध के अंतर्गत मुक्तक,दोहा घनाक्षरी, विधाता, हाइकु आदि।

साझा संकलन -माँ.. जिंदगी मेरी, सुलगते अल्फ़ाज़, आओ अब गांव लौट चलें, रामजी से राम-राम।

साहित्य सम्मान- हिंदी गौरव सम्मान, अभ्युदय लेखक सम्मान, प्रेम सुधा पहल सम्मान, शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान, उत्तम सृजन सम्मान, कविघोष रत्न सम्मान, श्रेष्ठ काव्य पथिक सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान, देवभूमि उत्तराखंड साहित्य सम्मान, विश्व हिंदी दिवस सम्मान 2024, राजा राम सम्मान, राम लला सम्मान, नववर्ष कवि सम्मान 2024, उत्तराखंड साहित्य साधक सम्मान, राब्ता काव्य शिरोमणि सम्मान, महिला शक्ति काव्य रत्न सम्मान, अर्धनारीश्वर सम्मान, उन्नत लेखन सम्मान, श्रेष्ठ साहित्यकार सम्मान, काव्य रक्षक, हिन्दी साहित्य सेवी सम्मान, साहित्य सृजन सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान, युवा रत्न सम्मान, हिन्दी रत्न सम्मान, युवा लेखक सम्मान।


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  • समाज और देश पर कविताएँ ~ पंकज बिंदास
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