हौसले और जीवन की कविताएँ ~ पंकज बिंदास

पंकज बिंदास की हौसले और जीवन की कविताएँ: मेरा आज मेरा कल बनाएगा, ऊर्जा, हौसला बढ़ाएं, कोई बात और सावन का एक गीत। प्रेरणा और संवेदना भरी रचनाएँ।

जीवन में कभी हौसले की ज़रूरत होती है, तो कभी दुख को समझने की। युवा कवि पंकज बिंदास की इन रचनाओं में आज के परिश्रम से कल बनाने का संकल्प है, ऊर्जा को सार्थक बनाने की सीख है, पृथ्वी और चाँद का हौसला बढ़ाने की कोमल कल्पना है, मन को घेरने वाली किसी बात का दर्द है, और अंत में सावन की रिमझिम का एक गीत।

यह एक अतिथि रचना है। रचनाओं में व्यक्त विचार रचनाकार के अपने हैं।


मेरा आज मेरा कल बनाएगा

मेरा आज मेरा कल बनाएगा
इसीलिए पढ़ो
इसीलिए गढ़ो
इसीलिए उठो
बीज सा फूटो
जर्जर हो टूटो
स्वयं से रूठो
स्वयं से पूछो
मेरा दिन आखिर कब आएगा
मेरा आज मेरा कल बनाएगा।
आग में तपो
बीज सा दबो
अन्न सा पको
बर्फ सी गलो
घड़ी सी चलो
नदी सी बहो
स्वयं से कहो
मेरा दिन आखिर कब आएगा
मेरा आज मेरा कल बनाएगा।

~ पंकज बिंदास

ऊर्जा

सबसे ज्यादा नेगेटिव ऊर्जा
उस बल्ब से निकलती है
जो सूर्योदय के बाद भी
जल रहा होता है
ऊर्जा को सार्थक होना चाहिए।

~ पंकज बिंदास

हौसला बढ़ाएं

पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर
एक साल में पूरा करती
चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर
एक महीने में पूरा करता
क्यों न प्रत्येक नववर्ष पर
पृथ्वी का हौसला बढ़ाएं
जैसे हम बढ़ाते हैं
किसी बड़े मैदान के
चक्कर पूरे करने पर
किसी एथलीट का।
क्यों न प्रत्येक पूर्णिमा पर
चांद का हौसला बढ़ाएं
जैसे बढ़ा देती है
किसी की मुस्कान
उसका चक्कर काट रहे
दीवाने का हौसला।

~ पंकज बिंदास

कोई बात

कभी-कभी कोई बात हमें
जीने नहीं देती है
कभी कोई वारदात हमें
सोने नहीं देती है
ज्वालामुखी विस्फोट के लावे
सा बिखरा हो दुःख सामने
दुःख के कारण को अवशोषित
कर देता जब दुःख का लावा
बिन कारण जाने हम मन
मसोसकर रह जाते हैं
अपनी किस्मत को ही
कृत्य का कारण समझते हैं
उन क्षणों में हृदय में भी
ज्वालामुखी फटते हैं
आंखों से लावे के नाले
याद जलाकर बहते हैं
काश! काश! की विरह- वेदना
मन को खा जाती है
कभी-कभी कोई बात हमें
जीने नहीं देती है
कभी कोई वारदात हमें
सोने नहीं देते हैं।
बनी-बनाई योजनाएं
धरी रह जातीं हैं
नदी किनारे लाश सी
पड़ी रह जाती है।

~ पंकज बिंदास

गीत

सावन की रिमझिम बारिश में
नाचे मेरा तन- मन- मोर।
मेघ- वेग से नभ आच्छादित
वन में बेमन डाल चकोर
तभी अचानक मेघ गगन से
छँटे सो विधु दिखा हँसे चकोर।।
मरुत् नहाती युवती सम है
जलकण शीतल लिए हुए,
चहुंदिशि सुंदर धरा हरित है
सुमन- उपेक्षित किए हुए
आसमान है अहा आनंदित
अट्टहास करता हुआ शोर
सावन की रिमझिम बारिश में
नाचे मेरा तन- मन- मोर।
बिजली- गर्जन से धरती है
लगती हँसती वधू समान
स्वाभिमान है बिजली, गर्जन-
मुखरित स्वर है गर्वित मान
निर्झरिणी में श्वेतामृत है
सरिता का नहीं दिखता छोर
सावन की रिमझिम बारिश में
नाचे मेरा तन- मन- मोर।

~ पंकज बिंदास


परिचय: पंकज बिंदास

उत्तराखंड की प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित माँ अलकनंदा और माँ मंदाकिनी नदियों के बीच स्थित भगवान कार्तिकेय और माता नैणी देवी की छत्रछाया में गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जनपद में आगर गाँव स्थित है। जहाँ 18 अगस्त 1997 को श्री जसपाल सिंह नेगी और श्रीमती छोटी देवी की द्वितीय संतान के रूप में पंकज बिंदास का जन्म हुआ, इनका बचपन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित और संपन्न कराते बीता,जो इनकी रचनात्मक का द्योतक है।प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में हुई तत्पश्चात हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज घिमतोली से पूरी की। कवि हृदय इन्हें बचपन से मिला था,सो बचपन से ही कविताएं लिखने का सिलसिला शुरू हुआ, प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा मिला की प्रकृति-प्रेमी हो गए तथा साहित्य में गहरी रुचि पैदा हुई।

परिणामस्वरूप हेमती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में पंकज बिंदास हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएचडी कर रहे हैं। विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो रही हैं, जिनमें- अभ्युदय,आकाश कविघोष, प्रांजल,कलश, मनसंगी आदि प्रमुख हैं।

साहित्यिक विधाएं- कविता (छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों),गीत, ग़ज़ल, कहानी, संस्मरण, छंदबद्ध के अंतर्गत मुक्तक,दोहा घनाक्षरी, विधाता, हाइकु आदि।

साझा संकलन -माँ.. जिंदगी मेरी, सुलगते अल्फ़ाज़, आओ अब गांव लौट चलें, रामजी से राम-राम।

साहित्य सम्मान- हिंदी गौरव सम्मान, अभ्युदय लेखक सम्मान, प्रेम सुधा पहल सम्मान, शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान, उत्तम सृजन सम्मान, कविघोष रत्न सम्मान, श्रेष्ठ काव्य पथिक सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान, देवभूमि उत्तराखंड साहित्य सम्मान, विश्व हिंदी दिवस सम्मान 2024, राजा राम सम्मान, राम लला सम्मान, नववर्ष कवि सम्मान 2024, उत्तराखंड साहित्य साधक सम्मान, राब्ता काव्य शिरोमणि सम्मान, महिला शक्ति काव्य रत्न सम्मान, अर्धनारीश्वर सम्मान, उन्नत लेखन सम्मान, श्रेष्ठ साहित्यकार सम्मान, काव्य रक्षक, हिन्दी साहित्य सेवी सम्मान, साहित्य सृजन सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान, युवा रत्न सम्मान, हिन्दी रत्न सम्मान, युवा लेखक सम्मान।


पंकज बिंदास की और कविताएँ

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