मोबाइल और सोशल मीडिया पर पंकज बिंदास की तीन कविताएँ: नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया और फोन चला रहा है। डिजिटल जीवन पर व्यंग्य और गहरी अंतर्दृष्टि।
हम फोन चलाते हैं, या फोन हमें चलाता है? युवा कवि पंकज बिंदास की ये तीन कविताएँ आज के डिजिटल जीवन को कविता की आँख से देखती हैं: परीक्षा के नोटिफिकेशन की उम्मीद और निराशा, सोशल मीडिया का घना जंगल, और स्क्रीन की चकाचौंध के बीच अंतर्दृष्टि की ज़रूरत।
यह एक अतिथि रचना है। रचनाओं में व्यक्त विचार रचनाकार के अपने हैं।
नोटिफिकेशन
नोटिफिकेशन आ गया
उसकी पथरीली आंखों में तेज आया
जीवन की संचित ज्ञान-पूंजी
वह उड़ेल सकता है
महज़ एक ओएमआर शीट पर।
नोटिफिकेशन आ गया
जैसे दीपावली से एक दिन पहले
दिल्ली रेलवे स्टेशन पर
आती है कोई ट्रेन हांफती हुई।
गहरे पानी के अंधकार में
जैसे मछलियों का जत्था
लपक पड़ता है मांस के गोले पर।
जलवायु परिवर्तन से असहाय
अपने अस्तित्व की लड़ाई में
नवजात मेमने पर जैसे-
टूट पड़ते हैं खाने को शाकाहारी भी।
नोटिफिकेशन आ गया
लाइब्रेरियां भरने लगीं
सबको लग रहा है अब
समाज हमें आदर देगा
सिर्फ मैं ही नहीं कॉल करूंगा किसी को
किसी का कॉल आएगा मुझे भी।
सबको लग रहा है अब
समुद्री तूफान में हमें रास्ता मिल जाएगा
अमेज़न के जंगल में हमें
बचाने को आएगा हेलीकॉप्टर।
नोटिफिकेशन आ गया
और खा गया कुछ महीनों में ही
लाखों सपनों का अचार
संघर्षों का मुरब्बा
और सब्र का गरमागरम सूप।
ज्ञान के मैदान में
सरस्वती का हार जाना
कितना अजीब है
खैर, लक्ष्मी खुश है।
~ पंकज बिंदास
सोशल मीडिया
सोशल मीडिया एक जंगल है घना जंगल
जिसमें रास्ता खो देता है आज का आदमी
घंटों चलने के बावजूद वो थक हारकर
आंखें मूंद लेता है वहीं पर सो जाता है।
सोशल मीडिया एक जंगल है घना जंगल
जहां छांव ही छांव है ठंडी छांव
लेकिन यह छांव है जाड़ों की, पूस की
पेड़ों के झुरमुट से बरस भी जाए एकाध किरण
तो उस किरण को सेंकना भूल गया आज का आदमी ।
सोशल मीडिया एक जंगल है घना जंगल
जिसमें कोई खास ऐप एक नदी सी है
उस नदी में अनवरत आंखें फाड़कर
बिना किसी लक्ष्य के बह रहा आज का आदमी।
~ पंकज बिंदास
फोन चला रहा है
फेसबुक की गलियों में
वट्सऐप के बाजार में
स्टेटस, रील्स की दुकानों पर
इतनी चकाचौंध है कि
दृष्टि पर्याप्त नहीं
अंतर्दृष्टि से चलना होगा
जैसे हमारी दृष्टि
नहीं देख सकती
हमारा ही फेस
बिना किसी उपादान के
और उपादान-
दृष्टिहीन करने के हैं
तो अपनी अंतर्दृष्टि खोलो
आप महसूसोगे-
आपको कौन चला रहा है?
आपका फोन चला रहा है।
~ पंकज बिंदास
परिचय: पंकज बिंदास
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित माँ अलकनंदा और माँ मंदाकिनी नदियों के बीच स्थित भगवान कार्तिकेय और माता नैणी देवी की छत्रछाया में गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जनपद में आगर गाँव स्थित है। जहाँ 18 अगस्त 1997 को श्री जसपाल सिंह नेगी और श्रीमती छोटी देवी की द्वितीय संतान के रूप में पंकज बिंदास का जन्म हुआ, इनका बचपन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित और संपन्न कराते बीता,जो इनकी रचनात्मक का द्योतक है।प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में हुई तत्पश्चात हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज घिमतोली से पूरी की। कवि हृदय इन्हें बचपन से मिला था,सो बचपन से ही कविताएं लिखने का सिलसिला शुरू हुआ, प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा मिला की प्रकृति-प्रेमी हो गए तथा साहित्य में गहरी रुचि पैदा हुई।
परिणामस्वरूप हेमती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में पंकज बिंदास हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में पीएचडी कर रहे हैं। विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं प्रकाशित हो रही हैं, जिनमें- अभ्युदय,आकाश कविघोष, प्रांजल,कलश, मनसंगी आदि प्रमुख हैं।
साहित्यिक विधाएं- कविता (छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों),गीत, ग़ज़ल, कहानी, संस्मरण, छंदबद्ध के अंतर्गत मुक्तक,दोहा घनाक्षरी, विधाता, हाइकु आदि।
साझा संकलन -माँ.. जिंदगी मेरी, सुलगते अल्फ़ाज़, आओ अब गांव लौट चलें, रामजी से राम-राम।
साहित्य सम्मान- हिंदी गौरव सम्मान, अभ्युदय लेखक सम्मान, प्रेम सुधा पहल सम्मान, शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान, उत्तम सृजन सम्मान, कविघोष रत्न सम्मान, श्रेष्ठ काव्य पथिक सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान, देवभूमि उत्तराखंड साहित्य सम्मान, विश्व हिंदी दिवस सम्मान 2024, राजा राम सम्मान, राम लला सम्मान, नववर्ष कवि सम्मान 2024, उत्तराखंड साहित्य साधक सम्मान, राब्ता काव्य शिरोमणि सम्मान, महिला शक्ति काव्य रत्न सम्मान, अर्धनारीश्वर सम्मान, उन्नत लेखन सम्मान, श्रेष्ठ साहित्यकार सम्मान, काव्य रक्षक, हिन्दी साहित्य सेवी सम्मान, साहित्य सृजन सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान, युवा रत्न सम्मान, हिन्दी रत्न सम्मान, युवा लेखक सम्मान।
पंकज बिंदास की और कविताएँ
- प्रेम की कविताएँ ~ पंकज बिंदास
- समाज और देश पर कविताएँ ~ पंकज बिंदास
- हौसले और जीवन की कविताएँ ~ पंकज बिंदास
आप भी अपनी रचनाएँ हिंदी साहित्य दर्पण पर भेज सकते हैं। आपको इनमें से कौन-सी कविता सबसे अच्छी लगी? नीचे टिप्पणी में बताइए।
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