राम की मुरली | प्रेरक प्रसंग | Motivational Hindi Story

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Heart Touching Moral Story

स्कूल के हेड मास्टर [Principal] ने अपनी आँफिस में दीवार-घड़ी पर नजर डाली ।  एक बज चुका ।  लंच ब्रेक का समय ।  लेकिन उसने घन्टे [Bell] की आवाज नहीं सुनी ।  क्या प्यून [Peon] घन्टा लगाना भूल गया उसे सन्देह [Doubt] हुआ ।

अचानक मुरली
[Flute] की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ी ।  करीब उसके साथ-साथ ही घन्टे की आवाज आई ।  बच्चे रिसेस का आनन्द लेने के लिये दौड़कर बाहर आने लगे ।  कुछेक बच्चे स्कूल के कम्पाउन्ड में एक पेड के नीचे एक नौ बर्ष के लड़के को घेरकर खड़े हो गये ।  वह मुरली बेचनेवाला राम था ।

वह हर रोज लंच के समय स्कूल में आया करता था ।  वह जैसे ही मुरली बजाना आरम्भ करता, प्यून समझ जाता कि घन्टा बजाने का समय हो गया ।  उसे घड़ी देखने की जरुरत नहीं पड़ती थी ।  यह दोनों के लिये आदत बन चुकी थी ।


राम की मुरली के संगीत के बहुत बच्चे प्रशंसक
[admirer] बन गये थे ।  कुछेक तो अपना टिफिन [Lunch box]  भी उसके साथ मिलकर खाने लगे ।  कुछ अध्यापको ने इसे पसन्द नहीं किया, उनमे से एक थे चौथी कक्षा के क्लास टीचर मि- दत्ता ।  उसे लगा कि मुरली बेचनेवाला अवांछनीय [undesirable] तत्व  होने के साथ-साथ बच्चों को खराब भी कर रहा है ।  उसने हेडमास्टर को शिकायत की ।  

हेड मास्टर
राम के पास गया और वहाँ एकत्र बच्चों को डाँटकर क्लास में भेज दिया ।  फिर राम को आँखे दिखाते हुए [staring] कहा, यहाँ से चले जाओ ।  और स्कूल में फिर कभी नहीं आना ।राम कुछ दिनों तक स्कूल नहीं आया ।  प्यून को उसकी कमी खटकने लगी, हालांकि
[Although] दोपहर का घनटा बजाने के लिये वह बहुत सावधानी [Precaution] बरतने लगा ।  बच्चो उदास होगये क्योंकि वे अब राम की मुरली के संगीत से वंचित [Deprived] हो गये थे और हर रोज उसका साथ भी छूट गया था, यघपि [Although] वह कुछ मिनटों के लिये ही होता था ।


एक दिन, मानो कोई चमत्कार हो गया हो, मुरली की चिर परिचित
[known/identical] धुन फिर सुनाई पड़ी ।  साथ-साथ लंच का घन्टा भी बज उठा ।  बच्चे सीधे राम की तरफ दौड़े ।  आज उसकी बहुत मुरलियाँ बिक गई ।  वह बच्चों को मुरली बजाना सिखा भी रहा था ।

मि.
दत्ता को मुरलीवाले की वापसी अच्छी नहीं लगी ।  वह हेड मास्टर को बुला कर ले आया ।  उसे आते देखकर बच्चों की भीड़े तितर-बितर
[Scattered] हो गई ।  कुछ बच्चे अब भी राम के पास मंडरा रहे थे ।  हेड मास्टर गुस्से से तमतमाता हुआ सीधा राम के पास गया और बिना कुछ बोले उसके गाल पर कसकर एक तमाचा जड़ दिया ।  वह कुछ क्षणों के लिये हक्का-वक्का
[shocked] हो गया ।  उसकी आँखों से आँसुओं की गंगा-जमुना बह पड़ी ।

हेड मास्टर घबरा गया ।  क्या उसने उसे ज्यादा कठोर सजा दे दी ।  उसने अपना पर्स निकाल ाऔर राम को ओर एक नोट बढ़ा दिया ।  किन्तु उसने विनयपूर्वक अस्वीकार कर दिया ।  सर, मैं कभी इस स्कूल में तीसरी कक्षा [third standard] का छात्र था ।  एक सड़क दुर्घटना [road accident] में मेरे माता-पिता की अचानक मृत्यु [sudden death] के कारण मेरी पढ़ाई रुक गई क्योंकि अपने माता पिता की मैं एकमात्र सन्तान था, और मेरे परिवार में मेरी देखभाल करने वाला कोई और नहीं था । मुझे गरीबी का सामना करना पड़ा, इसलिये मैंने मुरली [flute] बेचने का फैसला किया ।  सर, मैं अपने स्कूल को किसी तरह भूल नहीं पा रहा हूँ और यहाँ के बच्चो के साथ दोस्ती करना अच्छा लगता है ।  इसी आकर्षण [attraction] के कारण मैं यहाँ खिंचा चला आता हूँ ।  मैं स्कूल से दूर कैसे रह सकता हूँ ।  किन्तु यदि आपको ऐसा महसूस होता हो कि मैं आपके लिये एक समस्या हूँ तो मैं चला जाऊँगा।  हेड मास्टर राम की दुखभरी कहानी सुनकर अबाक रह गया ।  उसने मि. दत्ता की ओर देखा।  वह भी स्तंभित [astonished] थे

मुझे खेद है मेरे बच्चे ।  मुझे क्रोध नहीं करना चाहिये था ।  मत सोचो कि तुम अनाथ
[orphan] हो ।  हमलोग तुम्हारी देखभाल करेंगे ।  तुम्हें अपनी पढाई जारी रखनी चाहिये ।  कल स्कूल में आ जाना ।  तुम्हें चौथी कक्षा [Fourth standard] में दाखिला [admission] मिल जायेगा ।  हेड मास्टर ने सान्तवना देते हुए प्यार से राम से कहा ।

दूसरे दिन प्रातः असेम्वली के समय हेड मास्टर को राधू के पाकेट से एक मुरली झाँकती हुई दिखाई पड़ी ।  उसने
राम से असेम्बली आरम्भ होने से पहले मुरली पर एक प्रार्थना की धुन बजाने के लिये कहा ।  वास्तव में, तब से यह दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बन गया ।  


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