अनंत गुणों का विश्व- विद्यालय होती है नारी - जयप्रकाश | Guest Posts

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पग पग कसौटी पर कसती है नारी,
गुलाब की डाल जैसी होती है नारी,

अपने अथक कर्मों से त्याग, प्रेम,
संयम की सुगंध फ़ैलाती है नारी,
अन्यत्र विस्थापन पर भी सामंजस्य
की तकलीफों को सहन करके,
अलगाव की पीडा में स्मृतियों की मीठी
यादों के महातप से गुजरती है नारी,
विज्ञान के सिद्धांतों से अनभिज्ञ होते हुए भी,
अध्यात्म की सीमा को सहज ही स्पर्श कर लेती है नारी,
पूर्ण समर्पण की भाव धारा का
सुस्पष्ट प्रत्यक्ष शिक्षालय होती है नारी,
पुरुषार्थ के प्रथम चरण का अंकुर,
बालक के हृदय में ईश्वरीय अस्तित्व
की विराटता से उपजा देती है नारी,
विशेष पहचान ना पाकर भी,
समाज पुष्प को खिलाने वाली
मूल होती है हर एक नारी,
महत्त्व नहीं रखता हर एक
कोयले का हीरा बन जाना,
क्योंकि हीरे को चमक है
केवल कोयले के अंधकार में पाना,
पड जाये गुणों के बखान में
कम पोथियाँ भी सारी,
क्योंकि अनंत गुणों का विश्व-
विद्यालय होती है नारी।।


-जयप्रकाश 


कवि परिचय 


Name - Jaiprakash,

DOB - 04/04/1992,

Place of Birth - Mukundgarh (Rajasthan),

Profession - Student (M.Com.), University of Rajasthan.

Hobby - Poetry, Painting.



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COMMENTS

BLOGGER: 3
  1. samaj main nari ke anmol mahtav ko prakat karti hui eak prernadayi kavita hai

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

      हटाएं
    2. विचारों के सुव्यवस्थित मार्ग से प्रतिस्थापन की परिकल्पना के आधार पर भावों की प्रबलता को अनुभव करते हुए लेखनीबद्ध, पठित व उजागर किया गया प्रत्येक बोल, संकेत, शारीरिक अवस्थिति एवं हार्दिक मौन मात्रात्मक और संख्यात्मक आधिक्य, शाब्दिक भंडार का वैभव एवं व्यापक परिवेश न रखकर भी परस्पर प्रभावोत्पादकता, वस्तुस्थिति प्राकट्‌य और भावनात्मक औचित्य के गुणात्मक पहलु का अवलंबन लेते हुए किसी भी महानतम काव्य के समकक्ष स्थान रखता है।
      बशर्तें कि समक्ष पक्षकार मानवीय और निष्पक्षता के मुल्यों को प्रतिपल अपने अवचेतन मन में बरकरार रखता हो।
      आपने विचारप्रवाह की शब्द रूपी सरिता की हृदय की गहराई और उतनी ही सहजशक्ति से प्रसंशा कर, उसके सौंदर्य के अभिवर्धन में एक और आयाम जोड दिया है। प्रोत्साहित करने और हिंदी साहित्य दर्पण के माध्यम से हमारी मातृभाषा के उत्तरोत्तर विकास में अपनी मनोयोगपूर्ण भागीदारी के लिये आपका अतिसाधुवाद।
      जय हिंद।
      जय भारत।।

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