सभी शास्त्रों के मतानुसार क्या है कल्याण तथा प्रसन्नता का मार्ग - Bhartrihari Neeti Shatak Shloka 25 & 26

सभी शास्त्रों के मतानुसार क्या है कल्याण तथा प्रसन्नता का मार्ग! किसकी कृपा से मिलते हैं सर्वश्रेष्ट और मन वांछित फल ! Bhartrihari Neeti Shatak Shloka 25 & 26

Neeti Shatak Sansrit Sholka In Hindi And English,Neeti Shatak Quotes In Sanskrit Hindi And English


किसकी कृपा से मिलते हैं सर्वश्रेष्ट और मन वांछित फल !

सूनुः सच्चरितः सती प्रियतमा स्वामी प्रसादोन्मुखः
स्निग्धं मित्रमवञ्चकः परिजनो निःक्लेशलेशं मनः ।
आकारो रुचिरः स्थिरश्च विभवो विद्यावदातं मुखं
तुष्टे विष्टपकष्टहारिणि हरौ सम्प्राप्यते देहिना  ॥ २५ ॥

sUnuH sachcharitaH satI priyatamA svAmI prasAdonmukhaH
  snigdhaM mitramava~nchakaH parijano niShkleshaleshaM manaH |
AkAro ruchiraH sthirashcha vibhavo vidyAvadAtaM mukhaM

  tuShTe viShTapakaShTahAriNi harau samprApyate dehinA || 25||

भर्तृहरि नीति शतक श्लोक २५ का भावार्थ:

सदाचारी पुत्र, पतिव्रता पत्नी, प्रसन्नचित्त और हितैषी मालिक, प्रेम और मदद करने वाले मित्र, निष्कपट सेवक, क्लेशरहित मन, सुन्दर काया, स्थिर धन, ज्ञान से सुशोभुत मुख, ये सब सर्वश्रेष्ठ फल उस मनवांछित फल देनेवाले दुखहर्ता भगवान् विष्णु के अनुग्रह के बिना किसी भी मनुष्य को प्राप्त नहीं हो सकती।

Translation Of Bhartrihari Neeti Shatak Verse# 25 

A well-conducted son, a devoted wife, a liberal master, a loving friend, an honest servant, a mind free from even the least anxiety, a handsome form, abiding riches, a mouth, purified by learning—all these can be gained by a man when Lord Vishnu the destroyer of the troubles of the world is pleased.
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सभी शास्त्रों के मतानुसार क्या है कल्याण तथा प्रसन्नता का मार्ग


प्राणाघातान्निवृत्तिः परधनहरणे संयमः सत्यवाक्यं
  काले शक्त्या प्रदानं युवतिजनकथामूकभावः परेषाम् ।

तृष्णास्रोतोविभङ्गो गुरुषु च विनयः सर्वभूतानुकम्पा

  सामान्यः सर्वशास्त्रेष्वनुपहतविधिः श्रेयसामेष पन्थाः ॥ २६॥


भर्तृहरि नीति शतक श्लोक २६  का भावार्थ:

जीवों को चोट पहुँचाने से बचना, दूसरों का धन हरण करने की इच्छा न रखना, हमेशा सत्य बोलना, समयानुसार श्रद्धा से दान करना, परायी स्त्री की चर्चा करने और सुनाने से दूर रहना, अपनी इच्छाओं को अपने वश में करना, गुरुजनों का आदर करना और सब जीवों पर दया करना,- हम सब के लिए सभी शाश्त्रों के मतानुसार कल्याण तथा प्रसन्नता का मार्ग है।

Translation Of Bhartrihari Neeti Shatak Verse# 26 

Abstinence from destroying life, restraint in depriving others of their wealth, speaking the truth, timely liberality according to one's power, not even gossiping about the young ladies of others, checking the stream of covetousness, reverence for elders, compassion towards all creatures—this is the universal path to happiness violating no rules or ordinances of any Shastras.

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नीति शतक के पहले प्रकाशित किये गए श्लोक:


COMMENTS

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  1. चंचल मन निशदीन भटकत है और भटकावत है। सांसे रोकने का अभ्यास करे ध्यान करे जैसे सरपर कोई चीज रखी हो और गिरे नही। सांसे रोके ध्यान करे कोइ सोच विचार न करे परमात्मा है साथ बस परमात्मा हो जाव बाकी शरीर कोतो कीतनी जगा चहीए जब मर जाता है हमे तो सर्वगुण संपन्न निर्गुण निराकार भावातित गुणातित ईश्वर जीसकी सत्ता के बगैर पेडका पता भी नही हिलता न मनुष्य और सारे जीवोकी आँखकी पलक तक नही झपक सकती हमारे लिए स्थूल शरीरसे अच्छा सुक्ष्म शरीर और सूक्ष्म शरीरसे अच्छा कारण शरीर जो अहंब्रह्म ठीक है। सांसे रोके मस्तिष्कमें प्राणोसे पहचान हो जाएगी प्राण को पकडे आत्म ज्ञान होता है। आत्म ज्ञानीही पूरे विश्वका कल्याण कर सकता है। परमात्मा जो साथ है पल पल हमारी रक्षा भरण पोषण करता है हरेक कार्य हरेक रचनाकार रचैयता ईश्वरसे ही हो रहा है हम भी ईश्वर अंश है तो परमात्मा चेतनको जानकर ध्यानकर चिंतनकर मननकर उसीमें सदा रह नहि सकते क्या ? एक वही तो सारे विश्वका आधार विश्वेसर हमसब उसीमें रहे बस यही पार्थना प्रभु भूमी से पर हमारी सांसोसे जो शरीरमें रहती है और शरीरसे निकलते ही सीधी ईश्वरमे ही चली जाती है जो हम जीवरुप और नाम बनकर धरती पे रहना चाहे तो वह आगे कन्टीन्यु करता है पर हमारे आचरण आदत और कर्मोके आधार पर हमारी आखरी सोच जो मरते समय होती है मति वैसी गति होति है। जो बोले सो निहाल सत्त श्रीअकाल। सबका काल है पर अकाल है हमारी आत्मा जय सत्त चित्त आनंद जय सद्गुरुवर नम:

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  2. Stop Putting Your Faith In People. And Put It In The Good Lord.No Worries, I have.

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  3. Very Importance Article In Personel & Official Life Very Very Thanks

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