आतंक ~ अमर सिंह!

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कश्मीर वर्षों से झेल  रहा है आतंक की मार ,
और सह  रहा है  किसी कपटी और कायर के वार  ,

युद्ध-विराम की आड़ में किसी ने खुशहाली को मातम में बदल डाला  है,
सारे नियमों को ताक  पर रखकर पीठ में छुरा  घोंप  डाला है,

घाटी में पैदा कर दिया हैं चारों ओर  अशांति का हाल ,
बना दिया लोगों को शरणार्थी अपने ही देश में,किसकी  है ये चाल ?

दूर बैठा है कोई धरती के स्वर्ग  को हथियाने की फ़िराक  में ,
ज़िहाद  का ज़हर घोल कर,देश  तोड़ने की ताक में

जल रहा हैं आज तिरंगा  चौराहे पर,मुर्दाबाद के नारों में ,
खुले घूम रहे है देश  के गद्दार सत्ता के गलियारों में ,

कहाँ हैं इनकी निष्ठा ,इनके कारनामों पर तो राष्ट्र  भी शर्मिंदा है,
पर पता नहीं माँ भारती का अपमान करने वाले अभी तक कैसे ज़िंदा हैं ,

मानवता के इन्ही दुश्मनो ने शांतिवार्ता की आड़ में आतंक फैलाया है,
कभी संसद तो कभी मुंबई के ताज को निशाना बनाया  है,


पर लाख पैदा हो जाए अफजल और कसाब, हिंद्स्तान कभी टूट पायगा
देश की और आँख उठाने वालों को ऐसे ही फांसी  पर लटकाया जायेगा ,

बस ख़त्म हुईं धैर्य  की परीक्षा ,अब तो आर-पार की बारी है
विश्व के मानचित्र से इस कलंक को मिटने की शपथ  हमारी  हैं ,

अबकी बार आतंकवाद के इस गढ़ को तहस-नहस कर दिया जायेगा ,
जो काम रह गया था अधूरा सन इकत्तर में  उसे पूरा करने के लिए इतिहास दोहराया जायेगा।
~ अमर सिंह

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कवि परिचय:


मेरा नाम अमर सिंह हैंI मेरी उम्र 43 वर्ष हैंI मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर की पढाई की हैंI मैं पहले अंग्रेज़ी में कविताएं लिखता थाI अभी कुछ समय से हिंदी में कविताएं लिखना आरम्भ किया हैंI वर्तमान में, मै लोक सभा सचिवालय में संपादक के पद पर कार्यरत हूँI मुझे सामयिक विषयों पर कविताँए लिखना पसंद हैंI 

COMMENTS

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  2. अमर सिंह जी, आतंगवाद पर बहुत बढ़िया रचना.
    keep it up ......

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