क्यूंकि मैं बेटी थी - प्रवीन तोमर | Guest Post Of The Week

जनम लेने पर बहुत लोगो ने शोक मनाया , उनकी हर ज़िलातो को ख़ुशी ख़ुशी अपनाया हर छोटी बात पर रोकी गई , जिस ख़ुशी की थी हकदार वो भी नहीं मुझे दी गई हर ज़ुल्म को सह लेती थी, क्यूंकि मैं बेटी थी


जनम  लेने  पर  बहुत लोगो ने शोक  मनाया , उनकी हर ज़िलातो को ख़ुशी ख़ुशी अपनाया
हर छोटी बात पर रोकी गई , जिस ख़ुशी की थी हकदार  वो भी नहीं मुझे दी गई
हर ज़ुल्म को सह लेती थी, क्यूंकि मैं बेटी थी

नहीं तुम मोहले मे खेलने जाओगी, डर है की बिरादरी मे हमारी नाक कटाओगी
हुई थोड़ी बड़ी तो घर से बाहर अकेले जाना रोक गया, अगर की जरा सी किसीसे
बात तो सक  भरी आवाज़ से टोका गया
अकेले बिना किसीसे कुछ कहे रो लेती थी, क्यूंकि मैं बेटी थी

नहीं तुम बहार कही पढने  जाना, क्यूंकि ख़राब बहुत है ज़माना
विस्वास है तुम पर ज़माने पर नहीं, कही कुछ हो जाये साथ तुम्हारे गलत नहीं
कहीं तुमने वहां  किसी से जोड़ लिया, अपने परिवार से मुह तुमने मोड़ लिया
तो क्या इज्ज़त हमारी रह जाएगी, ऐसा होने से रहेगी आस की कब मौत हमें आयेगी
ये इलज़ाम मैं सह लेती थी, क्यूंकि मैं बेटी थी


ये पुकार है मेरी हर माँ बाप से, पालो बेटियों को बड़े नाज से
क्या किसीको चाहना गलत है, क्या अपनी पसंद  का साथी  पाना गलत है
क्यों हर बार लड़कियों पर ऊँगली उठाई जाती है, क्यों जो किया नहीं उसके लिए गाली सुनाई जाती है
क्या लड़की को ज़िन्दगी अपनी मर्जी से जीने का हक नहीं, अपनी ख्वाइश का दम
घोटकर तुम्हे खुश रखती हैं इसमें कोई सक नहीं
है अगर तुम्हारी उम्मीद उनसे तो वो भी कुछ उम्मीद रखती हैं, पर कही दुःख न हो तुम्हे इस बात से डरती हैं
एक बार मिलती है ज़िन्दगी उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने दो, ख्याल रखो उनका न किसी बात का गम उन्हें होने दो
मैं तुम्हारी हर छोटी बात से सहेम लेती थी, क्यूंकि मैं बेटी थी

-प्रवीन तोमर 
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Author Bio



Name: Praveen Tomar,
Profession: Electronics Engineer
Hobbies: Writing Poems, Shayaris









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COMMENTS

BLOGGER: 3
  1. Praveen ji ur Poem very very nice
    &
    Real Of Girl Life.

    जवाब देंहटाएं
  2. thank you vey much jitendra ji for appreciating my poem kyunki main beti thi....

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूब प्रवीन जी
    " क्यो की मैं बेटी थी.... सुंदर अभिव्यक्ति की आप ने

    जवाब देंहटाएं
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