विदुर नीति -अध्याय १ - दो का महत्व !!- Vidur Neeti In Hindi - Chpter 1 - Importance Of Two!!

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पृथ्वी किन दो को खा जाती है ?

द्वाविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिव ।
राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम् ॥ ४९॥

बिल में रहने वाले चूहे आदि जीवों को जैसे सांप खा जाता है, उसी प्रकार यह पृथ्वी शत्रु से डटकर मुकाबला न करने वाले राजा और परदेश न जाने वाले ब्राह्मण - इन दोनों को खा जाती है !!

किन कर्मों को करनेवाला विशेष शोभा पाता है ?

द्वे कर्मणी नरः कुर्वन्नस्मिँल्लोके विरोचते
अब्रुवन्परुषं किं चिदसतो नार्थयंस्तथा ५०॥

इन दो कर्मों को करनेवाला मनुष्य इस लोक में विशेष शोभा पाता है : जरा भी कठोर न बोलना और दुष्ट पुरुषों का आदर न करना !!

कौन दो प्रकार के लोग दूसरों पर विश्वास करके चलने वाले होते हैं ?

द्वाविमौ पुरुषव्याघ्र परप्रत्यय कारिणौ ।
स्त्रियः कामित कामिन्यो लोकः पूजित पूजकः ॥ ५१॥

दो प्रकार के लोग दूसरों पर विश्वास करके चलने वाले होते हैं, इनका अपना कोई इरादा या इच्छा शक्ति नहीं होती है :
१. दूसरी स्त्री द्वारा चाहे गए पुरुष की कामना करने वाली स्त्रियाँ,
२. और दूसरों द्वारा पूजे गए मनुष्य की पूजा करने वाले मनुष्य।

दो तीक्ष्ण कांटे!

द्वाविमौ कण्टकौ तीक्ष्णौ शरीरपरिशोषणौ
यश्चाधनः कामयते यश्च कुप्यत्यनीश्वरः ५२॥

ये दो तीक्ष्ण कांटे के सामान शरीर को बेध देते हैं :
१. निर्धन होकर भी बहुमूल्य वस्तुओं की कामना रखना
२. और असमर्थ होकर भी क्रोध करना !
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किन दो लोगों को शोभा नहीं प्राप्त होती?

द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा ।
गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः ॥- ॥


ये दो लोग ही अपने विपरीत कर्म के कारण शोभा नहीं पाते :
१.आलसी या अकर्मण्य गृहस्थ
२. प्रपंच में संलग्न सन्यासी

कौन स्वर्ग से भी ऊपर स्थान पाते हैं ?

द्वाविमौ पुरुषौ राजन्स्वर्गस्य परि तिष्ठतः ।
प्रभुश्च क्षमया युक्तो दरिद्रश्च प्रदानवान् ॥ ५३॥

राजन ! ये दो प्रकार के पुरुष स्वर्ग से भी ऊपर स्थान पाते हैं :
१. शक्तिशाली होने पर भी क्षमा करने वाला,
२. और निर्धन या गरीब होकर भी दान करने वाला !

धन के दो दुरूपयोग  

न्यायागतस्य द्रव्यस्य बोद्धव्यौ द्वावतिक्रमौ ।
अपात्रे प्रतिपत्तिश्च पात्रे चाप्रतिपादनम् ॥ ५४॥

न्यायपूर्वक कमाए गए धन के दो ही दुरुपयोग हो सकते हैं :
१. अपात्र को दिया जाना,
२. और सत्पात्र को न दिया जाना   

किन दो को डुबो देना चाहिए ?

द्वावम्भसि निवेष्टव्यौ गले बद्ध्वा दृढं शिलाम् ।
धनवन्तमदातारं दरिद्रं चातपस्विनम् ॥- ॥

जो धनी होने पर भी दान न करे और दरिद्र/निर्धन  होने पर भी कष्ट सहन न करे सके - इन दो प्रकार के मनुष्यों के गले में बड़ा व् मजबूत पत्थर बांधकर पानी में डुबो देना चाहिए

किनको उच्च गति प्राप्त होती है ? 

द्वाविमौ पुरुषव्याघ्र सुर्यमण्डलभेदिनौ ।
परिव्राड्योगयुक्तश्च रणे चाभिमुखो हतः ॥- ॥

ये दो प्रकार के पुरुष सूर्यमंडल को भी भेद कर सर्वोच्च गति को प्राप्त करते हैं :
१. योगयुक्त सन्यासी और
२. और युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त योद्धा

विदुर नीति की अन्य कड़ियाँ:

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